कोकराझार में 4 नवंबर 2026 को एक संगठित कार्यालय निकासी अभ्यास और आपदा जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय प्रशासन, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और स्कूलों के छात्र-छात्राएँ भाग लेकर आपदा प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों और नागरिकों को आपात स्थिति में सही ढंग से कार्य करने के तरीके से परिचित कराना तथा क्षेत्र की आपदा प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना था।
आपदा प्रबंधन पर जागरूकता: कार्यक्रम की शुरुआत
अभियान की शुरुआत सुबह 9 बजे कोकराझार के मुख्य प्रशासनिक भवन में हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया, जिन्होंने कहा कि “आपदा के समय शांति और अनुशासन सबसे बड़ी हथियार हैं।” इसके बाद एक लाइव डेमो के माध्यम से निकासी के क्रम, आपातकालीन संपर्क नंबर और प्राथमिक चिकित्सा के बुनियादी उपायों पर प्रकाश डाला गया।
सिमुलेटेड निकासी अभ्यास: वास्तविक अनुभव
सभी प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में बाँटा गया और उन्हें एक नकली आग के परिदृश्य के तहत निकासी का अभ्यास कराया गया। भवन के सभी प्रवेश द्वारों से बाहर निकलते हुए, कर्मचारियों ने निर्धारित निकासी मार्गों का पालन किया, जहाँ पर सुरक्षा कर्मियों ने समय-समय पर मार्गदर्शन दिया। अभ्यास के दौरान एक अनुभवी फायर फाइटर ने “सही समय पर निकासी से जान बचाई जा सकती है” का संदेश दिया।
सामुदायिक सहभागिता: स्कूल और NGO का योगदान
अभियान में स्थानीय स्कूलों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया, जिन्होंने आपदा के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदमों को प्रदर्शित किया। एक NGO के प्रतिनिधि ने बताया कि “किसी भी आपदा में सबसे पहले बच्चे और बुज़ुर्गों की रक्षा करनी चाहिए।” इसके अलावा, एक वर्कशॉप में जल-जनित रोगों और स्वच्छता के महत्व पर चर्चा की गई।
डिजिटल उपकरण और सूचना प्रसार: नई रणनीति
अभियान के अंत में एक डिजिटल पैनल पर चर्चा हुई, जिसमें मोबाइल ऐप्स और सोशल मीडिया के माध्यम से आपदा सूचना के प्रसार पर प्रकाश डाला गया। एक तकनीकी विशेषज्ञ ने बताया कि “वास्तविक समय में सूचना साझा करने से आपदा प्रबंधन में काफी सुधार होता है।”
निष्कर्ष
कोकराझार में आयोजित यह कार्यालय निकासी अभ्यास और आपदा जागरूकता अभियान एक सफल उदाहरण है कि कैसे स्थानीय सरकार, नागरिक समाज और शैक्षणिक संस्थान मिलकर आपदा प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल कर्मचारियों को आपात स्थिति में सही कार्य करने का ज्ञान दिया, बल्कि सामुदायिक स्तर पर भी आपदा के प्रति जागरूकता फैलाई। भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित कर क्षेत्रीय सुरक्षा और तैयारी को और भी सुदृढ़ किया जा सकता है।


