दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा बुधवार को नौ शामनाथ मार्ग पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए

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दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा बुधवार को नौ शामनाथ मार्ग पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए

दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने 4 नवंबर 2026 को नौ शामनाथ मार्ग पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने राजधानी की सांस्कृतिक नीतियों में नवीनतम बदलावों और योजनाओं को प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से डिजिटल संग्रहालय, भाषा संरक्षण, शिक्षा सुधार और सामाजिक समावेश पर जोर दिया गया। मंत्री ने बताया कि दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को नयी तकनीकों और समावेशी नीतियों के माध्यम से सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने विरासत के प्रति जागरूक रहें और उसे आगे बढ़ा सकें। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रमुखों, शिक्षाविदों और पत्रकारों ने भी अपनी राय साझा की, जिससे संवाद खुला और कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका तैयार हुई।

नयी डिजिटल संग्रहालय परियोजना से कला का नया आयाम

मंत्री मिश्रा ने दिल्ली के प्रथम डिजिटल संग्रहालय की घोषणा की, जिसका उद्देश्य शहर की समृद्ध कलात्मक धरोहर को डिजिटल रूप में संरक्षित करना है। इस परियोजना के तहत 20,000 से अधिक कलाकृतियों, पांडुलिपियों और फोटोग्राफों को 3D स्कैनिंग और हाई-रेज़ोल्यूशन इमेजिंग से डिजिटल किया जाएगा। यह संग्रहालय न केवल स्थानीय कलाकारों के कार्यों को प्रदर्शित करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाने के लिए मल्टीलिंगुअल इंटरफ़ेस भी उपलब्ध कराएगा। इस पहल से शोधकर्ताओं, छात्रों और पर्यटकों को सहज पहुँच मिलेगी, जिससे दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान विश्व स्तर पर मजबूत होगी।

भाषा संरक्षण: स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने के कदम

कपिल मिश्रा ने दिल्ली की विविध भाषाई परंपराओं को संरक्षित करने के लिए ‘भाषा संरक्षण योजना’ की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस योजना के अंतर्गत दिल्ली की प्रमुख बोलियों—जैसे कि अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी, और बंगाली—को राज्यव्यापी स्कूलों और कॉलेजों में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। साथ ही, ‘भाषा क्लब’ और ‘सांस्कृतिक कार्यशाला’ के माध्यम से युवाओं में इन बोलियों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी। मंत्री ने यह भी बताया कि इस योजना के तहत एक ‘भाषा पोर्टल’ बनाया जाएगा, जहाँ भाषा के इतिहास, साहित्य और समकालीन उपयोग के संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

कला शिक्षा में सुधार: स्कूलों में नवीन कार्यक्रम

मंत्री ने दिल्ली के शिक्षा बोर्ड के साथ मिलकर ‘कला और रचनात्मकता कार्यक्रम’ (CAP) की शुरुआत की घोषणा की। इस कार्यक्रम के तहत प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूलों में चित्रकला, संगीत, नृत्य और नाटक को अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया जाएगा। साथ ही, ‘कला प्रशिक्षक बूटकैम्प’ के माध्यम से शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण विधियों से लैस किया जाएगा। इसके अलावा, राज्यभर में ‘कला मेले’ और ‘स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम’ के आयोजन से छात्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समावेश

कपिल मिश्रा ने बताया कि आगामी वर्ष में दिल्ली में ‘सांस्कृतिक समावेश महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में विभिन्न सामाजिक, जातीय और धार्मिक समूहों के कलाकारों को एक मंच मिलेगा, जहाँ वे अपनी कला और परंपराओं को प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सहिष्णुता और एकता की भावना को जगाना है। साथ ही, ‘सांस्कृतिक पथ प्रदर्शन’ के माध्यम से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच समृद्धि और समझदारी बढ़ेगी।

निष्कर्ष

कपिल मिश्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली की सांस्कृतिक नीतियों में एक नया अध्याय खोला है। डिजिटल संग्रहालय, भाषा संरक्षण, कला शिक्षा सुधार और सामाजिक समावेश के प्रयासों से शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी। इन पहलों के माध्यम से दिल्ली न केवल अपने इतिहास को संरक्षित रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और समावेशी सांस्कृतिक परिदृश्य भी तैयार करेगा।