एएसजी आई हॉस्पिटल ने ‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दीवाली’ अभियान शुरू किया।

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एएसजी आई हॉस्पिटल ने ‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दीवाली’ अभियान शुरू किया।

एएसजी आई हॉस्पिटल ने 5 नवंबर 2026 को “सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दीवाली” नामक अभियान की शुरुआत की, जिसका मुख्य उद्देश्य दीपावली के दौरान होने वाली आंखों की चोटों और संक्रमणों से लोगों को बचाना है। इस पहल के तहत अस्पताल ने न केवल जागरूकता फैलाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए, बल्कि स्थानीय समुदाय में सुरक्षित रीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न शैक्षिक और चिकित्सीय सेवाएँ भी उपलब्ध कराईं। यह अभियान दीवाली के पावन त्योहार के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

दीवाली पर आंखों की सुरक्षा: क्यों ज़रूरी है

दीवाली के दौरान पटाखे, रौद्रिक रोशनी और तेज़ धुआँ आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। पटाखों के विस्फोट से उत्पन्न तेज़ रोशनी और धुआँ, आंखों के पलक, कंजक्टिवा और रेटिना पर हानिकारक हो सकते हैं। इसके अलावा, अंधेरे में तेज़ रोशनी के साथ खेलते समय आँखों पर चपलता से जलन और सूजन हो सकती है। एएसजी आई हॉस्पिटल के अनुसार, 2025 के आंकड़ों में पटाखों के कारण हुई आंखों की चोटों में 12 % की वृद्धि हुई थी। इसलिए इस अभियान के माध्यम से लोगों को सुरक्षित रीतियों के बारे में जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।

एएसजी आई हॉस्पिटल का अभियान: प्रमुख पहल और कार्यक्रम

अभियान के तहत अस्पताल ने “सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दीवाली” कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें आंखों के लिए सुरक्षित पटाखों के चयन, आँखों की सुरक्षा के लिए चश्मे और मास्क का उपयोग, तथा आपातकालीन उपचार के तरीकों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, अस्पताल ने मुफ्त विज़न चेकअप और आँखों के स्वास्थ्य पर सेमिनार आयोजित किये, जहाँ विशेषज्ञों ने पटाखों के प्रभाव और आंखों की स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। अभियान के दौरान अस्पताल ने 5,000 से अधिक लोगों को मुफ्त चश्मे और रक्षात्मक उपकरण वितरित किए, जिससे दीवाली के दौरान आँखों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

सुरक्षित दीवाली के लिए व्यावहारिक सुझाव

1. सुरक्षित पटाखों का चयन – कम धुआँ और कम तेज़ रोशनी वाले पटाखे चुनें।

2. चश्मे और मास्क का उपयोग – आँखों को धुआँ और तेज़ रोशनी से बचाने के लिए सुरक्षात्मक चश्मे और मास्क पहनें।

3. साफ़ जगह पर फटाके – फटाके फोड़ते समय साफ़ और खुली जगह का चयन करें, ताकि धुआँ और मलबा आँखों तक न पहुँचें।

4. हाथों का साफ़ रखना – फटाकों के बाद हाथों को साबुन से धोएँ, ताकि धुआँ और रसायन आँखों में न जाएँ।

5. आपातकालीन उपचार – यदि आँख में जलन या चोट लगे, तो तुरंत अस्पताल या क्लिनिक जाएँ और आँखों को ठंडे पानी से धोएँ।

सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता बढ़ाने के कदम

अभियान के तहत स्थानीय स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों में जागरूकता सत्र आयोजित किये गये। साथ ही, सोशल मीडिया पर “#सुरक्षितआंखेंसुरक्षितदीवाली” हैशटैग के माध्यम से जानकारी फैलायी गयी। अस्पताल ने स्थानीय कलाकारों के साथ मिलकर जागरूकता पोस्टर और वीडियो भी तैयार किये, जिन्हें सार्वजनिक स्थानों पर लटकाया गया। इन प्रयासों से लोगों की जागरूकता बढ़ी और दीवाली के दौरान आँखों की सुरक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक बदलाव आया।

निष्कर्ष

एएसजी आई हॉस्पिटल के “सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दीवाली” अभियान ने दीवाली के पावन अवसर को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जागरूकता, शिक्षा और सुरक्षित रीतियों के प्रसार से न केवल आंखों की चोटों में कमी आई, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के प्रति एक नई चेतना भी जागृत हुई। इस अभियान के सफल कार्यान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य संस्थानों और समाज के बीच सहयोग से सार्वजनिक स्वास्थ्य में बड़े परिवर्तन लाए जा सकते हैं। सुरक्षित दीवाली के लिए यह अभियान एक मिसाल बनकर सामने आया है, और आने वाले समय में भी इसी तरह के कार्यक्रमों से स्वास्थ्य जागरूकता को और बढ़ाया जा सकता है।