राज्यपाल रमेन डेका ने आज गुरुवार को लोकभवन में असम राज्य सहित देश-विदेश में सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की।

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राज्यपाल रमेन डेका ने आज गुरुवार को लोकभवन में असम राज्य सहित देश-विदेश में सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की।

रमन डेका, असम के राज्यपाल, ने आज गुरुवार को लोकभवन में भूपेन हजारिका जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम असम के सांस्कृतिक मंच पर एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिसमें राज्य के प्रमुख कलाकारों, संगीतज्ञों और जनता ने मिलकर भारत रत्न भूपेन हजारिका के योगदान को याद किया। इस कार्यक्रम में भूपेन जी की संगीत रचनाएँ, गाने और उनकी जानी-पहचानी आवाज़ें बजती रहीं, जो सभी उपस्थित लोगों को भावुक कर गईं। राज्यपाल ने पुष्पांजलि के साथ एक छोटा भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भूपेन जी की बहुमुखी प्रतिभा और असम की सांस्कृतिक पहचान को जगाने में उनके योगदान को सराहा।

लोकभवन में समर्पित श्रद्धांजलि: रमन डेका का मान

लोकभवन के भव्य मंच पर रमन डेका ने भूपेन हजारिका के सम्मान में पुष्पांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में असम के प्रमुख राजनेताओं, सांस्कृतिक कलाकारों और जनता ने भाग लिया। डेका ने भूपेन जी की संगीत और साहित्य में योगदान को याद करते हुए कहा, “उनकी धुनें आज भी असम के हर कोने में गूँजती हैं।” कार्यक्रम के दौरान भूपेन जी के गाने बजते रहे, जिससे उपस्थित सभी को सांगीतिक आनंद मिला।

भूपेन हजारिका: संगीत और संस्कृति के विश्वप्रसिद्ध दिग्गज

भूपेन हजारिका को 1998 में भारत रत्न से नवाज़ा गया था, जो उनकी विश्व स्तर पर मान्यता का प्रतीक है। उन्होंने असम के लोक संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचाया। उनकी रचनाएँ, जैसे “जगजीत सिंह” और “रंगीन” ने असम की सांगीतिक धरोहर को नई पहचान दिलाई। भूपेन जी के संगीत में असम की मिट्टी की खुशबू और सामाजिक मुद्दों की गहराई झलकती है, जिसने उन्हें ‘संगीत के पंडित’ का उपाधि दिलाई।

राज्यपाल की भावनाएँ: ‘उनकी धुनें आज भी जीवित हैं’

राज्यपाल रमन डेका ने भाषण में भूपेन जी की संगीत यात्रा को “संगीत की अनंत धारा” के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा, “भूपेन जी ने असम को विश्व मानचित्र पर स्थापित किया। उनकी धुनें आज भी असम के हर घर में गूँजती हैं।” डेका ने भूपेन जी के संगीत के माध्यम से असम की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की प्रशंसा की और कहा कि भविष्य में भी ऐसी धरोहर को संरक्षित करने के लिए अथक प्रयास जारी रहेंगे।

भविष्य की दिशा: असम की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

इस कार्यक्रम ने असम की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। राज्यपाल ने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि वे भूपेन जी की तरह कला के क्षेत्र में योगदान दें। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता और शिक्षा कार्यक्रमों के विस्तार का वादा किया। असम सरकार ने यह भी घोषणा की कि आने वाले वर्षों में भूपेन जी के नाम पर एक सांगीतिक केंद्र खोला जाएगा, जिससे असम की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊर्जा मिलेगी।

निष्कर्ष

रमन डेका द्वारा लोकभवन में भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर अर्पित श्रद्धांजलि असम के सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। यह कार्यक्रम न केवल भूपेन जी के संगीत और साहित्य के प्रति सम्मान को दर्शाता है, बल्कि असम के युवा कलाकारों को भी प्रेरित करता है। भूपेन जी की धुनों की अनंत धारा आज भी असम की सांगीतिक परंपरा को जीवित रखती है, और राज्यपाल की दयालु प्रतिबद्धता से यह सुनिश्चित होता है कि असम की सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहेगी।