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पत्रकारिता में खोज और अन्वेषण मूल्यों का अधिकाधिक समावेश हो—राज्यपाल

जयपुर, 14 मई (हि.स.)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा है कि पत्रकारिता में खोज और अन्वेषण मूल्यों का विकास जरूरी है। उन्होंने इज़राइल के अपने यात्रा संस्मरण सुनाते हुए कहा कि वहां पत्रकारिता में शोध को पहले पन्ने पर प्रकाशित किया जाता है। पत्रकारिता में यह दृष्टि अपनाई जाए। उन्होंने भारतीय शोध का अधिकाधिक पेटेंट करवाने का भी आह्वान किया।

राज्यपाल बागडे मंगलवार को विश्व संवाद केन्द्र फाउंडेशन द्वारा आयोजित नारद जयंती व पत्रकार सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मौखिक मीडिया की प्रासंगिकता कई बार दूसरे मीडिया से अधिक होती है। महर्षि नारद इसी मीडिया से जुड़े थे। उन्होंने पीओके के इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि यह उस समय की ऐतिहासिक भूल थी। उन्होंने कहा कि पीओके निर्माण का पाप लार्ड माउंटेन बेटेन का था।

उन्होंने कहा कि भारत में बाहरी आक्रांता इसलिए हावी रहे कि हमारे यहां आंतरिक एकता का अभाव था। एक राजा दूसरे राजा की मदद नहीं करता था। उन्होंने कहा कि भारत बदल रहा है। उन्होंने राष्ट्र भक्ति, सावरकर और भारत पाकिस्तान सम्बन्धों की चर्चा करते हुए कहा कि देश प्रेम का जज्बा बदले भारत की सुनहरी तस्वीर है।

राज्यपाल ने महर्षि अरविंद की चर्चा करते हुए कहा कि पंडित नेहरू ने उनके दर्शन की विशेष रूप से “डिस्कवरी ऑफ इंडिया” में चर्चा की है। अरविंद ने बच्चों की बौद्धिक क्षमता कैसे बढ़ें, इसी पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि लार्ड मैकाले द्वारा भारत को मानसिक रूप से गुलाम बनाए रखने के लिए अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति इसी आलोक में लागू की है कि बच्चे भारतीय ज्ञान की परंपरा से जुड़े और उनकी बौद्धिक क्षमता का विकास हो।

राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति का परिणाम अभी नहीं आयेगा, दस बीस सालों में दिखेगा। आने वाले समय में देश की बौद्धिक और नैतिक प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि याद रखें जो देश अपना इतिहास भूलते हैं, वे राष्ट्र का भूगोल भी भूलने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि 1150 में भास्कराचार्य ने लीलावती नाम का ग्रन्थ लिखकर बता दिया था कि गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी और आकाश में परस्पर आकर्षण रहता है। इसी शोध को न्यूटन के नाम से हम जानते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पर विश्वास के लिए अपने आत्म में झांकना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि नारद जयंती पत्रकारिता के मूल्यों से जुड़ी है। नारद जी तीनों लोकों में हर प्रकार की सूचनाओं का आदान प्रदान मौखिक करते थे। यही तब की पत्रकारिता थी। इससे पहले उन्होंने विभिन्न वर्गों में पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि जो पत्रकार सम्मानित हुए हैं, वे समाज के लिए अनुकरणीय हैं।

इससे पहले मुख्य वक्ता पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा ऑपरेशन सिंदूर में भारत की नैतिकता की विजय हुई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की बहुत कुशल और प्रभावी रणनीति की विश्वभर में सराहना हुई है। उन्होंने इस दौरान भारत और पाकिस्तान मीडिया में पत्रकारिता की रही दृष्टि की भी विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर डा. हेमंत सेठिया, चैन सिंह राजपुरोहित ने भी विचार रखे।

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