झारखंड में एआई तकनीक से हाथियों की सुरक्षा का अभिनव प्रयास

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📍 पश्चिम सिंहभूम, 15 जून (हि.स.)

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक ऐतिहासिक पहल के तहत अब हाथियों की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह झारखंड में रेलवे द्वारा अपनाई गई पहली एआई आधारित प्रणाली है, जिसका उद्देश्य ट्रेन और हाथियों के बीच होने वाली टक्कर की घटनाओं को रोकना है।


🚄 ‘एलीसेंस लाइव’ सिस्टम क्या है?

चक्रधरपुर रेलवे मंडल द्वारा लागू की गई यह प्रणाली:

  • हाथियों की ट्रैक के पास मौजूदगी की तुरंत पहचान करती है
  • तस्वीर और वीडियो के ज़रिए अधिकारियों को अलर्ट भेजती है
  • जानवर की संख्या, दिशा और मूवमेंट की लाइव जानकारी उपलब्ध कराती है

🐘 हाथियों से ही सिखाई जा रही पहचान

गुजरात के जामनगर वनतारा चिड़ियाघर से दो प्रशिक्षित हाथियों को लाकर एआई सिस्टम को “ट्रेनिंग” दी जा रही है। ये हाथी विभिन्न परिस्थितियों में ट्रैक के पास चलाए जा रहे हैं ताकि सिस्टम उनके हाव-भाव, गति और आकार को समझ सके


📍 किन मार्गों पर लगाया गया है सिस्टम?

यह प्रणाली विशेष रूप से हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग के इन संवेदनशील खंडों पर तैनात की गई है:

  • जराईकेला-महादेवशाल
  • धुतरा-बागडीह
  • मानीकुई-चांडिल
  • कुनकी-चांडिल

इन क्षेत्रों में ट्रेनों की रफ्तार अधिक होती है और हाथियों के ट्रैक पार करने की घटनाएं आम हैं।


💡 इस पहल की पृष्ठभूमि

इस तकनीकी योजना की प्रेरणा 2023 की एक दुखद घटना से मिली थी, जब बंडामुंडा ए केबिन के पास एक हाथी के बच्चे की ट्रेन से टकराकर मौत हो गई थी। इसने वन्यजीव और मानव संरचनाओं के बीच संवेदनशील संतुलन की आवश्यकता को उजागर किया।


💰 20 करोड़ की परियोजना से बड़ी उम्मीदें

करीब ₹20 करोड़ लागत वाली यह परियोजना आने वाले समय में:

  • हाथियों की जान बचाने
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने
  • “संवेदनशील और स्मार्ट रेल संचालन” की दिशा में एक नया मॉडल बनने जा रही है।

🗣️ अधिकारियों की राय

वन विभाग के अनुसार:

“AI सिस्टम की सटीकता को बढ़ाने के लिए व्यवहारिक अभ्यास किया जा रहा है। यह तकनीक भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकती है।”

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