झांसी से मिली नई पहचान
उत्तर प्रदेश के झांसी में कठिया गेहूं GI टैग मिलने के बाद किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। योगी सरकार, नाबार्ड और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय किसानों को बेहतर बाजार और पहचान दिलाने के लिए सहयोग कर रहे हैं।
किसानों के बीच एमओयू
कृषि विभाग की पहल पर बांदा, हमीरपुर और महोबा के 20-20 किसानों के समूहों ने झांसी एफपीओ के साथ एमओयू किया है। अब ये किसान भी प्रायोगिक तौर पर कठिया गेहूं की खेती शुरू करेंगे। बुवाई का मुख्य समय अक्टूबर है, जिसके लिए एफपीओ ने तैयारी तेज कर दी है।
उत्पादन और प्रसंस्करण
फिलहाल झांसी के कठिया व्हीट फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन से 740 किसान जुड़े हैं, जो 250 एकड़ में खेती कर रहे हैं। अब आसपास के जिलों से एमओयू के बाद संख्या 800 तक पहुंच गई है। एफपीओ ने बंगरा क्षेत्र में कठिया गेहूं पर आधारित प्रोसेसिंग प्लांट भी शुरू किया है, जहां से दलिया बनाया जा रहा है।
किसानों को मिला सहयोग
एफपीओ अध्यक्ष सियाराम कुशवाहा ने बताया कि उत्पादन क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए नए जिलों के किसानों से समझौता हुआ है। इस प्रक्रिया में कृषि विभाग, नाबार्ड और रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूरा सहयोग कर रहे हैं।
कृषि उत्पादों को बढ़ावा
झांसी का कठिया गेहूं GI टैग न सिर्फ क्षेत्र की पहचान बना रहा है, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का अवसर भी दे रहा है। यह पहल उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।