अमेरिकी दबाव के बीच भारत की मजबूती
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ नीतियों का असर गहरा रहा है। कई देशों के निर्यात और निवेश प्रवाह पर दबाव बढ़ा है। लेकिन इसके बीच भारत जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़कर दुनिया को चौंका रहा है।
ताजा आंकड़े
सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की जीडीपी 7.8% रही। यह न केवल पिछले साल की 6.5% दर से ज्यादा है बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान को भी पार कर गई। वैश्विक तनाव और अमेरिकी दबाव के बावजूद यह उपलब्धि असाधारण है।
क्षेत्रवार विकास
कृषि क्षेत्र में 3.7% की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र क्रमशः 7.7% और 7.6% की दर से बढ़े। सेवा क्षेत्र ने 9.3% की तेज रफ्तार हासिल की। यानी खेतों से लेकर फैक्ट्रियों और डिजिटल सेवाओं तक हर क्षेत्र में विकास की गति मजबूत बनी रही।
निवेश और उपभोग
सकल स्थायी पूंजी निर्माण 7.8% बढ़ा, जो उद्योगों और बुनियादी ढांचे में निवेश का संकेत है। सरकारी उपभोग व्यय में भी 9.7% की वृद्धि दर्ज हुई। ग्रामीण मांग और सरकारी योजनाओं ने इस वृद्धि को और सहारा दिया।
वैश्विक परिदृश्य
जहां अमेरिका और यूरोप मंदी की आशंकाओं से जूझ रहे हैं, वहीं IMF भी मान रहा है कि भारत आने वाले वर्षों में 6% से ज्यादा की वृद्धि बनाए रखेगा। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा जनसंख्या आधार, डिजिटल इकोनॉमी और आत्मनिर्भर भारत जैसी नीतियां हैं।
निष्कर्ष
अमेरिकी टैरिफ दबाव भारत को डरा नहीं पाया। बल्कि भारत जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़कर यह साबित कर दिया कि उसकी अर्थव्यवस्था आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और जनसहयोग से और भी मजबूत हो रही है।