देवभूमि हरिद्वार के वैरागी कैंप में भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा ‘ऋषि क्षेत्र’ का भव्य अनावरण किया गया। यह आयोजन माता भगवती देवी एवं अखंड दीपक के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया।
इस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समारोह में देश की कई विशिष्ट विभूतियों ने सहभागिता कर इसे गरिमा प्रदान की।
🕉️ ऋषि परंपरा का नवजागरण
पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री एवं सांसद अजय भट्ट ने कहा कि
“गुरुदेव द्वारा बोया गया तप, साधना और सेवा का बीज आज विराट वटवृक्ष बन चुका है। यह अखंड दीपक की तरह पूरी मानवता को प्रकाश दे रहा है।”
उन्होंने गायत्री परिवार की कर्मयोगी भावना और सेवा परंपरा की सराहना की।
📜 आध्यात्मिकता से जीवन में संतुलन – मुख्य सचिव
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि
“आध्यात्मिकता जीवन को दिशा और संतुलन देती है। वही शिक्षा सार्थक है जो चरित्र और लोककल्याण से जुड़ी हो।”
उन्होंने युगऋषि की उस सोच को रेखांकित किया जिसमें समाज के बीच रहकर सेवा करना ही सच्चा धर्म है।
🔥 भारत को सशक्त बनाने का मार्ग – डॉ. चिन्मय पंड्या
गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि
“भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए भारतीय संस्कृति को सशक्त बनाना होगा।”
उन्होंने माता भगवती देवी के संदेश और ऋषि परंपरा के पुनर्जीवन को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
🤝 सभी वर्गों को जोड़ने का प्रयास
विश्व हिंदू परिषद के मिलिंद परांडे ने कहा कि
“गायत्री परिवार ने जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है।”
मेयर किरण जैसल सहित अन्य अतिथियों ने भी गायत्री परिवार की साधना, सेवा और संस्कार आधारित राष्ट्रनिर्माण की सराहना की।
🎖️ सम्मान और सहभागिता
इस अवसर पर कई विशिष्ट व्यक्तियों को देवसंस्कृति विश्वविद्यालय प्रतीक, युग साहित्य, गंगाजली और उपवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, प्रशासनिक अधिकारी, शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि तथा देशभर से आए हजारों स्वयंसेवक मौजूद रहे।




