06 जनवरी 1989 भारतीय इतिहास के उन दिनों में से एक है, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। इसी दिन भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी सतवंत सिंह और केहर सिंह को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। यह फैसला चार साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद लागू हुआ।
🔫 31 अक्टूबर 1984 – एक राष्ट्र को झकझोर देने वाला दिन
31 अक्टूबर 1984 की सुबह इंदिरा गांधी अपने नई दिल्ली स्थित आवास से बाहर निकल रही थीं, तभी उनके दो सुरक्षा कर्मियों —
बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी।
बेअंत सिंह को मौके पर ही अन्य सुरक्षाकर्मियों ने मार गिराया, जबकि सतवंत सिंह गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
🕵️♂️ साजिश में केहर सिंह की भूमिका
जांच के दौरान यह सामने आया कि इस हत्या की साजिश में केहर सिंह की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। अदालत ने सबूतों के आधार पर सतवंत सिंह और केहर सिंह को दोषी ठहराया।
⚖️ न्यायिक प्रक्रिया और अंतिम फैसला
मामले में कई वर्षों तक सुनवाई, अपीलें और कानूनी प्रक्रियाएं चलीं। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने दोनों दोषियों की मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा।
⛓️ 06 जनवरी 1989 – न्याय का दिन
06 जनवरी 1989 को सुबह दोनों दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। इस दिन को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में न्याय की जीत और आतंक के खिलाफ कठोर संदेश के रूप में देखा जाता है।
🇮🇳 लोकतंत्र पर हमला
इंदिरा गांधी की हत्या न केवल एक व्यक्ति की मौत थी, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र पर हमला था। यह घटना देश के लिए एक गहरे घाव की तरह रही, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव पर गंभीर सवाल खड़े किए।




