भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष की पश्चिम मेदिनीपुर और विशेष रूप से खड़गपुर में बढ़ती सक्रियता ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। लगातार जनसंपर्क अभियानों, पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद और हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद यह साफ संकेत मिल रहा है कि दिलीप घोष एक बार फिर अपने पारंपरिक गढ़ में मजबूती से वापसी के मूड में हैं।
🔥 खड़गपुर से चुनाव लड़ने की खुली दावेदारी
मीडिया से बातचीत में दिलीप घोष ने हाल ही में कहा था—
“मुझे बर्धमान से लड़ाने की क्या जरूरत थी? खड़गपुर की जनता ने मुझे दो बार जिताया है। पार्टी कहेगी तो मैं खड़गपुर से ही चुनाव लड़ूंगा।”
इस बयान के बाद भाजपा के अंदरखाने सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर खड़गपुर में दिलीप घोष को मैदान में उतार सकती है।
⚔️ हिरन चटर्जी का जवाब – अंदरूनी टकराव के संकेत
खड़गपुर के मौजूदा भाजपा विधायक हिरन चटर्जी ने दिलीप घोष का नाम लिए बिना सख्त लहजे में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—
“टिकट का फैसला केंद्रीय चुनाव समिति करती है। वही तय करती है कि कौन कहां से लड़ेगा।”
उन्होंने आगे जोड़ा—
“अगर 2026 में वही समिति मुझे फिर खड़गपुर से उम्मीदवार बनाती है, तो मैं चाहूंगा कि दिलीप बाबू भाजपा और मेरे लिए प्रचार करें।”
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी तंज कसा—
“अगर सिटिंग सांसद को दूसरी सीट पर भेजना अन्याय था, तो मैं भी यहां का सिटिंग विधायक हूं।”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान भाजपा के भीतर संभावित गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष की ओर इशारा करता है।
🏛️ दिलीप घोष का खड़गपुर कनेक्शन
दिलीप घोष का खड़गपुर और पश्चिम मेदिनीपुर से पुराना नाता रहा है।
- 2016 में उन्होंने खड़गपुर सदर से जीत दर्ज कर भाजपा को बंगाल में मजबूत पहचान दी।
- 2019 में मेदिनीपुर लोकसभा सीट से टीएमसी के दिग्गज नेता मानस भुइयां को हराकर बड़ा उलटफेर किया।
अब उनकी नई सक्रियता को पार्टी में राजनीतिक पुनरुत्थान की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
📍 जमीनी राजनीति में वापसी
रविवार को दिलीप घोष ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। रात को वे खड़गपुर स्थित अपने बंगले पहुंचे, जहां सरस्वती पूजा के अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक बैठक की। इसके बाद वे एक सामाजिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए।
इन सभी गतिविधियों से साफ है कि दिलीप घोष न केवल राजनीति में लौट चुके हैं, बल्कि खड़गपुर को एक बार फिर अपना राजनीतिक केंद्र बनाने की तैयारी में हैं।




