पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हाशिए पर रहने वाले समुदायों को मतदाता सूची से बाहर होने से बचाने के लिए निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और संवेदनशील कदम उठाया है। आयोग ने राज्य के 12 से अधिक जिलों में 160 विशेष विकेंद्रीकृत सुनवाई केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी है।
📍 किन जिलों में खुलेंगे केंद्र
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार ये विशेष केंद्र दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, झाड़ग्राम, पुरुलिया, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, नदिया, पश्चिम बर्दवान, हावड़ा और उत्तर 24 परगना में खोले जाएंगे।
ज़रूरत पड़ने पर दक्षिण 24 परगना के तटीय इलाकों में भी ऐसे केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।
🏛️ जिला प्रशासन की भूमिका
इन जिलों के जिला मजिस्ट्रेट, जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं, उन्होंने अपने क्षेत्रों में इन विशेष केंद्रों की आवश्यकता बताते हुए प्रस्ताव भेजे थे। उनकी सिफारिशों को सही मानते हुए निर्वाचन आयोग ने इसे मंजूरी दे दी है।
🧑🤝🧑 हाशिए के समुदायों को राहत
निर्वाचन आयोग का स्पष्ट उद्देश्य है कि गरीब, दूरदराज, प्रवासी, यौनकर्मी, ट्रांसजेंडर और संन्यासी जैसे वर्ग किसी भी तरह की प्रक्रियात्मक जटिलता के कारण मतदान अधिकार से वंचित न हों।
इसी वजह से आयोग ने पहले ही पहचान दस्तावेजों को लेकर विशेष छूट दी है और अब स्थानीय स्तर पर सुनवाई शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है।
🏕️ कैसे काम करेंगे ये केंद्र
ये अस्थायी सुनवाई शिविर के रूप में दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में लगाए जाएंगे।
यहां निर्वाचन अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे और तुरंत समाधान का प्रयास करेंगे, ताकि किसी को जिला मुख्यालय जाने की मजबूरी न हो।
🗳️ लोकतंत्र को मजबूत करने की पहल
चुनाव आयोग का यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पात्र नागरिक केवल तकनीकी कारणों से वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे। यह पहल बंगाल में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशिता दोनों को मजबूत करेगी।




