🔹 झील पर संकट
बाराबंकी की ऐतिहासिक भगहर झील में Bhaghar Lake Crisis गहराती जा रही है।
करीब सौ बीघे की यह झील जलकुंभी से ढक चुकी है।
🔹 सुंदरता हुई फीकी
हरे-भरे पानी की जगह अब सिर्फ खरपतवार दिख रही है।
इससे झील की प्राकृतिक खूबसूरती लगभग खत्म हो गई है।
🔹 पर्यटन पर असर
स्थानीय लोग कहते हैं कि सिर्फ 12 एकड़ साफ हो जाए तो नाव चल सकती है।
लेकिन Bhaghar Lake Crisis के कारण यह भी संभव नहीं है।
🔹 पहले बनी थी योजना
एक साल पहले जलकुंभी से खाद बनाने की बात हुई थी।
पर यह योजना अभी तक जमीन पर नहीं उतरी।
🔹 अधूरे पड़े काम
झील सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाएं अब भी अधूरी हैं।
छुट्टियों में आने वाले लोग निराश लौट जाते हैं।
🔹 पक्षियों पर खतरा
ठंड में यहां विदेशी पक्षी आते थे।
अब Bhaghar Lake Crisis से उनका आना कम हो गया है।
🔹 पानी की कमी
जलकुंभी के कारण साफ पानी नहीं मिल पाता।
इससे पक्षियों को रहने में परेशानी होती है।
🔹 स्थानीय मांग
ग्रामीण चाहते हैं कि जल्द सफाई अभियान चले।
साथ ही पर्यटन परियोजनाएं पूरी हों।
🔹 वन विभाग का पक्ष
रेंजर पी. के. सिंह ने बजट की कमी बताई।
उन्होंने कहा—सफाई बहुत बड़ा और महंगा काम है।
🔹 एनआरएलएम योजना फेल
पहले एनआरएलएम से खाद बनाने की बात हुई थी।
लेकिन Bhaghar Lake Crisis पर काम आगे नहीं बढ़ा।
🔹 क्यों जरूरी समाधान
अगर सफाई हुई तो रोजगार और पर्यटन बढ़ेगा।
नाव, स्टीमर और इको-टूरिज्म शुरू हो सकता है।
🔹 आगे क्या होगा
प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे।
नहीं तो Bhaghar Lake Crisis और गंभीर हो जाएगी।
🔹 कुल मिलाकर असर
भगहर झील की पहचान बचाने का वक्त आ गया है।
अब सबकी नजर सरकार की कार्रवाई पर टिकी है।




