पटना, 20 जनवरी (हि.स.) — बिहार सरकार ने भूमि विवादों को कम करने और आम नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए Bihar land measurement reform के तहत जमीन मापी की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इसकी जानकारी दी।
सात निश्चय-3 के तहत बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री ने कहा कि सात निश्चय-3 (2025-30) के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत यह पहल की गई है। समय पर जमीन की मापी न होने से अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं, इसलिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं।
नई समय सीमा क्या होगी?
मुख्यमंत्री के अनुसार:
- 31 जनवरी 2026 तक सभी लंबित मापी आवेदनों का निपटारा विशेष अभियान के तहत किया जाएगा।
- 1 अप्रैल 2026 से:
- अविवादित जमीन – शुल्क जमा करने के 7 कार्य दिवस के भीतर मापी।
- विवादित जमीन – शुल्क जमा करने के 11 कार्य दिवस के भीतर मापी।
रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य
मापी के बाद अमीन द्वारा तैयार रिपोर्ट को आवेदन की तिथि से 14वें दिन तक निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था करेगा तथा पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
मुख्यमंत्री की अपील
नीतीश कुमार ने कहा कि यह पहल प्रदेशवासियों के जीवन को सरल बनाएगी और भूमि विवादों में कमी आएगी। उन्होंने जनता से इस संबंध में सुझाव भी मांगे हैं।




