🔹 POCSO Romeo Juliet Cases पर हाईकोर्ट की चिंता
राजस्थान उच्च न्यायालय ने अहम टिप्पणी की है।
अदालत ने POCSO Romeo Juliet Cases पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
🔹 सहमति और उम्र का जटिल सवाल
कोर्ट ने कहा कि कानून सहमति और बलात्कार में अंतर नहीं कर पाता।
अठारह वर्ष की सख्त सीमा कई मामलों में अन्याय पैदा करती है।
🔹 निकट उम्र वाले मामलों में परेशानी
कई मामलों में उम्र का अंतर बेहद कम होता है।
एक मामले में तो अंतर केवल एक घंटे का था।
🔹 न्यायिक विवेकाधिकार सीमित
वर्तमान कानून न्यायपालिका को सीमित विकल्प देता है।
इससे सहमति वाले रिश्ते भी गंभीर अपराध बन जाते हैं।
🔹 2012 से पहले स्थिति अलग थी
POCSO लागू होने से पहले ऐसे मामले अपराध नहीं थे।
अब सहमति के बावजूद न्यूनतम दस वर्ष की सजा है।
🔹 हाईकोर्ट का अहम फैसला
न्यायमूर्ति अनिल उपमन ने युवक को राहत दी।
अदालत ने एफआईआर और ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई रद्द की।
🔹 पीड़िता के बयान को महत्व
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने आरोपी को बेगुनाह बताया।
मेडिकल रिपोर्ट भी आरोप के खिलाफ थी।
🔹 सामाजिक अस्वीकृति बन रही कारण
अदालत ने कहा कि कई मामले माता-पिता की असहमति से दर्ज होते हैं।
न्याय प्रणाली सामाजिक मर्यादा का हथियार नहीं बन सकती।
🔹 संतुलन की जरूरत
कोर्ट ने राज्यहित और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में संतुलन पर जोर दिया।
बिना संतुलन कानून किशोर प्रेम का अपराधीकरण करता है।
🔹 युवाओं के भविष्य का सवाल
POCSO Romeo Juliet Cases में युवाओं का भविष्य दांव पर लगता है।
ऐसा दृष्टिकोण सुधारवादी न्यायशास्त्र को कमजोर करता है।
🔹 विधायी सुधार की मांग
अदालत ने विवेकाधिकार देने वाले प्रावधान की जरूरत बताई।
इससे अनावश्यक अपराधीकरण रोका जा सकेगा।




