🔹 Shab-e-Barat in Kashmir की पावन रात
कश्मीर घाटी में शब-ए-बारात श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई।
मंगलवार रात मस्जिदों और दरगाहों में विशेष नमाज़ अदा की गई।
🔹 मस्जिदों में जुटे अकीदतमंद
घाटी की प्रमुख मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
पूरी रात इबादत और दुआओं का सिलसिला चलता रहा।
🔹 क्षमा और रहमत की रात
Shab-e-Barat in Kashmir को क्षमा की रात माना जाता है।
इस अवसर पर लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।
🔹 कब्रिस्तानों में जलाई गई मोमबत्तियां
श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर दुआ की।
कब्रिस्तानों में मोमबत्तियां जलाकर याद किया गया।
🔹 रमज़ान से पहले खास महत्व
शब-ए-बारात रमज़ान से लगभग दो सप्ताह पहले मनाई जाती है।
इस रात को इस्लाम में विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है।
🔹 शांतिपूर्ण माहौल में आयोजन
पूरी घाटी में धार्मिक आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुए।
प्रशासन की ओर से भी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।
🔹 श्रीनगर सहित पूरे कश्मीर में आयोजन
श्रीनगर सहित कई इलाकों में नमाज़ अदा हुई।
Shab-e-Barat in Kashmir हर क्षेत्र में समान श्रद्धा से मनाई गई।
🔹 भक्ति और भाईचारे का संदेश
यह पर्व आत्मचिंतन और सुधार का संदेश देता है।
समाज में भाईचारे और शांति की भावना को मजबूत करता है।
🔹 धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण
Shab-e-Barat in Kashmir कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत दर्शाती है।
इससे धार्मिक परंपराओं की निरंतरता बनी रहती है।




