🔹 चुनाव नज़दीक, बढ़ता राजनीतिक दबाव
नेपाल में 5 मार्च को होने वाले चुनाव अब बेहद करीब हैं।
Nepal Election Strategy के तहत पार्टियों पर दबाव साफ दिख रहा है।
🔹 जेन-जी आंदोलन का असर
सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन ने राजनीतिक माहौल बदल दिया।
इस आंदोलन की आलोचना अब भी केपी शर्मा ओली का पीछा कर रही है।
🔹 आलोचनाओं से घिरी यूएमएल
हिंसा की जिम्मेदारी न लेने के आरोप यूएमएल पर भारी पड़ रहे हैं।
हाल की संवेदना पोस्ट भी जन-असंतोष को शांत नहीं कर सकी।
🔹 मजबूत सीटों पर चुनौती
काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह का झापा-5 से उतरना चर्चा में है।
यह सीट ओली का पारंपरिक गढ़ मानी जाती रही है।
🔹 पार्टी नेतृत्व पर खतरा
दांग-2 में महासचिव शंकर पोखरेल को कड़ा मुकाबला मिल रहा है।
इससे Nepal Election Strategy और जटिल हो गई है।
🔹 सीमित गठबंधन की तलाश
इन हालात में ओली सीमित सीट सहयोग पर विचार कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष गगन थापा ने गठबंधन से इनकार किया है।
🔹 प्रचंड पर भी दबाव
एनसीपी समन्वयक पुष्पकमल दाहाल ने भावुक संदेश जारी किया है।
उन्होंने युवा नेतृत्व को आगे लाने की बात कही।
🔹 यूएमएल–एनसीपी चर्चा
Nepal Election Strategy के तहत दोनों दलों में बातचीत की अटकलें हैं।
हालांकि, यह चर्चा कुछ सीटों तक सीमित बताई जा रही है।
🔹 अंदरूनी विरोध भी तेज
वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल ने गठबंधन को नुकसानदेह बताया है।
उनका कहना है कि माफी के बिना सहयोग संभव नहीं।
🔹 अंतिम फैसला बाकी
यूएमएल नेतृत्व सार्वजनिक रूप से गठबंधन से इनकार कर रहा है।
लेकिन पर्दे के पीछे संवाद की चर्चाएं जारी हैं।
🔹 आगे क्या होगा
विश्लेषकों का मानना है कि हार का खतरा रणनीति बदल सकता है।
अब देखना है कि Nepal Election Strategy किस दिशा में जाती है।




