🔹 Devnimori Relics Sri Lanka में ऐतिहासिक क्षण
भारत और श्रीलंका के प्राचीन संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष कोलंबो लाए गए हैं।
🔹 गंगारामया मंदिर में स्थापना
अवशेषों को गंगारामया मंदिर में स्थापित किया गया।
यह कार्य पारंपरिक बौद्ध रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।
🔹 विशेष विमान से कोलंबो पहुंचाए गए
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार अवशेष विशेष विमान से श्रीलंका पहुंचे।
पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका स्वागत किया गया।
🔹 भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति
भारतीय दल का नेतृत्व आचार्य देवव्रत ने किया।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी शामिल रहे।
🔹 राष्ट्रपति ने किया उद्घाटन
प्रदर्शनी का उद्घाटन अनुरा कुमार दिसानायके ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु मौजूद रहे।
🔹 दो विशेष प्रदर्शनियां भी शुरू
मंदिर में दो विषयक प्रदर्शनियों का उद्घाटन हुआ।
इनमें पिपरावा अवशेष और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाया गया है।
🔹 पहली बार भारत से बाहर प्रदर्शनी
यह भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी है।
पहले कपिलवस्तु और सारनाथ अवशेष दिखाए गए थे।
🔹 स्वतंत्रता दिवस से जुड़ा आयोजन
यह कार्यक्रम श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित हुआ।
इससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया।
🔹 प्रधानमंत्री की घोषणा का परिणाम
यह पहल नरेन्द्र मोदी की घोषणा का परिणाम है।
उन्होंने बौद्ध संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
🔹 शाश्वत संदेश का प्रतीक
Devnimori Relics Sri Lanka करुणा और अहिंसा का संदेश देती हैं।
इससे दोनों देशों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्ते गहरे हुए हैं।




