गंध यात्रा से हुई शुरुआत
Barpeta Satra में महोत्सव शुरू हुआ।
बरपेटा सत्र दौल महोत्सव पांच दिनों तक चलेगा।
2 मार्च को गंध यात्रा से शुभारंभ हुआ।
श्रीकृष्ण की भव्य झांकी
दौल गोविंद महाप्रभु को मणिकूट से बाहर लाया गया।
महास्नान पर्व श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।
बरपेटा सत्र दौल महोत्सव में भक्तों की भीड़ उमड़ी।
होली गीत प्रतियोगिता आकर्षण
26वें वर्ष बाटे-बाटे होली गीत प्रतियोगिता हुई।
20 से अधिक टीमों ने प्रस्तुति दी।
बरपेटा सत्र दौल महोत्सव में हजारों लोग शामिल हुए।
पांच दिनों का सांस्कृतिक पर्व
3 से 5 मार्च तक भर्दौल मनाया जाएगा।
6 मार्च को रंगों का फाकुआ उत्सव होगा।
बरपेटा सत्र दौल महोत्सव सत्रीया परंपरा का प्रतीक है।
असम की सांस्कृतिक विरासत
इस सत्र की स्थापना Madhavdeva ने की थी।
यह उत्सव असम की समृद्ध परंपरा दर्शाता है।
बरपेटा सत्र दौल महोत्सव में भक्ति और रंग साथ दिखते हैं।



