900 करोड़ की ऑनलाइन ठगी का खुलासा
Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने गुरुवार को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन धोखाधड़ी मामले का भंडाफोड़ किया।
यह मामला दुबई स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म Pyypl से जुड़ा है, जिसके जरिए निवेश और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर हजारों भारतीयों से करीब 900 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
चार राज्यों में 15 स्थानों पर छापेमारी
सीबीआई ने दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में कुल 15 ठिकानों पर छापेमारी की।
यह कार्रवाई Indian Cyber Crime Coordination Centre से मिले इनपुट के आधार पर की गई।
निवेश के नाम पर लोगों को फंसाया
जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं के जरिए लोगों को उच्च मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित करता था।
शुरुआत में छोटे निवेश पर फर्जी मुनाफा दिखाया जाता था, जिसके बाद पीड़ितों से बड़ी रकम निवेश कराई जाती थी।
म्यूल खातों से विदेश भेजी जाती थी रकम
एजेंसी के अनुसार ठगी की रकम को कई फर्जी या म्यूल बैंक खातों के जरिए तुरंत ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि पैसे का स्रोत छिपाया जा सके।
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय एटीएम निकासी और विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म पर वॉलेट टॉप-अप के माध्यम से रकम विदेश भेज दी जाती थी।
चार्टर्ड अकाउंटेंट को बताया मास्टरमाइंड
जांच में दिल्ली-गुरुग्राम सीमा के बिजवासन गांव के चार्टर्ड अकाउंटेंट Ashok Kumar Sharma को इस नेटवर्क का सरगना बताया गया है।
आरोप है कि उन्होंने सैकड़ों करोड़ रुपये म्यूल खातों और विदेशी वित्तीय चैनलों के जरिए बाहर भेजे।
शेल कंपनियों के जरिए हुआ लेनदेन
जांच में पता चला कि पिछले एक वर्ष में करीब 900 करोड़ रुपये 15 शेल कंपनियों के खातों के जरिए विदेश भेजे गए।
रकम को भारत स्थित वर्चुअल एसेट एक्सचेंजों के माध्यम से Tether USDt में बदला गया और फिर व्हाइट-लिस्टेड क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर किया गया।
संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले
सीबीआई ने सितंबर 2025 में इस मामले से जुड़े कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था।
हालिया तलाशी के दौरान एजेंसी को कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कई निर्दोष लोगों को धोखे से शेल कंपनियों का निदेशक बनाया गया था।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
सीबीआई ने मुख्य आरोपित अशोक शर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान अन्य आरोपियों, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और ठगी की रकम को ट्रैक कर फ्रीज किया जाएगा।



