एथलीट-केंद्रित शासन की जरूरत पर जोर
P. T. Usha ने भारतीय खेलों में एथलीट-फर्स्ट गवर्नेंस को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि देश के खेल तंत्र का भविष्य ऐसी नीतियों पर निर्भर करेगा, जिनमें खिलाड़ियों को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में रखा जाए।
राष्ट्रीय सम्मेलन में दिया संबोधन
रविवार को Sports Journalists Federation of India के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन India Habitat Centre में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की तैयारी, कल्याण और विकास खेल प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
यह सम्मेलन Delhi Sports Journalists Association की मेजबानी में आयोजित किया गया।
खेलों में बदलता परिदृश्य
पीटी उषा ने कहा कि भारत इस समय अपने खेल सफर के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
उन्होंने बताया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और संस्थागत समर्थन के कारण भारतीय खिलाड़ी अब वैश्विक मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
जमीनी स्तर पर प्रतिभा को बढ़ावा
उन्होंने कहा कि भारतीय खेलों की असली ताकत गांवों, कस्बों और स्कूलों में मौजूद प्रतिभाओं में है।
अगर कोचिंग, बुनियादी ढांचे और प्रतिभा पहचान में लगातार निवेश किया जाए तो भारत लगातार विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार कर सकता है।
खेल पत्रकारिता की भूमिका अहम
पीटी उषा ने खेल पत्रकारों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि वे केवल परिणाम बताने वाले नहीं होते, बल्कि खिलाड़ियों के संघर्ष और उपलब्धियों की कहानियों को सामने लाते हैं।
भारत खेल विकास के अहम मोड़ पर
सम्मेलन के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में Raghuram Iyer ने कहा कि भारत खेल विकास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती महत्वाकांक्षा, निवेश और भागीदारी भारत को एक प्रमुख खेल राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की तैयारी
रघुराम अय्यर ने कहा कि भारत भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में भी काम कर रहा है।



