गुजरात के अहमदाबाद में स्थित चारतोड़ा कब्रिस्तान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने कब्रिस्तान प्रबंधन को नोटिस जारी कर करीब 300 कब्रों को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई शहर के रोड डेवलपमेंट प्लान (RDP) के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए की जा रही है।
नगर निगम द्वारा जारी नोटिस में कब्रिस्तान की चहारदीवारी और कब्रों को हटाने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार सड़क की चौड़ाई 30.50 मीटर की जानी है, जिसकी जद में कब्रिस्तान का बड़ा हिस्सा आ रहा है।
🕌 600 साल पुरानी दरगाह भी प्रभावित
गोमतीपुर के पार्षद जुल्फिकार खान पठान ने बताया कि इस कब्रिस्तान में स्थित ‘दादी माई का रोज़ा’ करीब 600 साल पुरानी ऐतिहासिक दरगाह है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 में गुजरात हाईकोर्ट में सरकार ने आश्वासन दिया था कि कब्रिस्तान में कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। इसके बावजूद अब नगर निगम का यह नोटिस बेहद चौंकाने वाला है।
⚖️ वक्फ संपत्ति होने का दावा
पार्षदों का कहना है कि यह जमीन वक्फ अधिनियम के तहत संरक्षित है, जिसे बिना कानूनी प्रक्रिया के स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ कमेटी इस कब्रिस्तान का प्रबंधन करती है और वर्ष 1944 से इसे आधिकारिक कब्रिस्तान का दर्जा प्राप्त है।
🧑🤝🧑 स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत
स्थानीय निवासी अयूब भाई ने कहा कि उनके पिता और कई परिजनों की कब्रें इसी कब्रिस्तान में हैं। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन मृतकों की कब्रों को नुकसान पहुंचाए बिना विकास होना चाहिए।
🗣️ विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष के नेता शहजाद खान पठान ने कहा कि आरडीपी के नाम पर 600 साल पुरानी दरगाह और सैकड़ों कब्रों को हटाना शर्मनाक है। कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम को ज्ञापन देकर नोटिस वापस लेने की मांग की है।
📌 वैकल्पिक कब्रिस्तान नहीं
पार्षद इकबाल शेख ने बताया कि नगर निगम ने मुस्लिम समाज के लिए कोई वैकल्पिक कब्रिस्तान उपलब्ध नहीं कराया है। निगम के अनुसार लगभग 286 कब्रें हटाने की योजना है, जो धार्मिक और मानवीय दोनों दृष्टि से बेहद संवेदनशील मामला है।




