पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब के पावर स्वरूप के गायब होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण से जुड़े विवाद के बीच अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को नोटिस जारी कर 15 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह नोटिस अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज द्वारा जारी किया गया है।
अकाल तख्त साहिब की ओर से जारी पत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पंथ विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा अकाल तख्त साहिब की सिख रहित मर्यादा और उसकी सर्वोच्चता को बार-बार ठेस पहुंचाई गई है।
🔴 गुरु की गोलक और आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा गुरु की गोलक को लेकर बार-बार अभद्र टिप्पणियां की गई हैं, जिससे सिख समुदाय की भावनाओं को आघात पहुंचा है।
अकाल तख्त सचिवालय के अनुसार, उनके समक्ष कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु साहिबान और कौमी शहीद जरनैल सिंह भिंडरावाला की तस्वीरों के साथ अनुचित गतिविधियों में संलिप्त बताया गया है।
🧑⚖️ संवैधानिक पद पर रहते हुए मर्यादा उल्लंघन का आरोप
अकाल तख्त के सिंह साहिबानों ने अपने आदेश में कहा है कि
“मुख्यमंत्री एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं और इस तरह की गतिविधियां न केवल सिख विरोधी हैं, बल्कि सत्ता के अहंकार को भी दर्शाती हैं।”
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सिख परंपरा के अनुसार किसी मुख्यमंत्री को अकाल तख्त की फसील के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता। इसलिए भगवंत मान को 15 जनवरी सुबह 10 बजे अकाल तख्त सचिवालय में उपस्थित होकर अपने बयानों और वीडियो पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के संबंधों में एक नए विवाद का संकेत देता है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी व धार्मिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।




