📚 इविवि में “आदिवासी साहित्य एवं महाश्वेता देवी” पर व्याख्यान
प्रयागराज स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय में “आदिवासी साहित्य एवं महाश्वेता देवी” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता कथाकार एवं चिंतक रणेन्द्र ने कहा कि Mahashweta Devi Tribal Literature ने आदिवासी अस्मिता को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित किया है।
✍️ आदिवासी जीवन और संघर्ष की लेखनी
रणेन्द्र ने बताया कि महाश्वेता देवी की अधिकांश रचनाएं आदिवासी जीवन, संघर्ष और संवेदना पर आधारित हैं। उनके प्रथम उपन्यास झांसी की रानी से लेकर अरण्येर अधिकार तक इतिहास और लोकसंघर्ष उनकी लेखनी का मूल स्वर रहा।
🏆 साहित्य अकादमी से सम्मानित कृति
1977 में प्रकाशित अरण्येर अधिकार के लिए उन्हें 1979 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। रणेन्द्र ने कहा कि बिरसा मुंडा को राष्ट्रीय नायक के रूप में प्रतिष्ठित करने में उनकी लेखनी की बड़ी भूमिका रही।
🔥 ‘द्रौपदी’ और प्रतिरोध की चेतना
चर्चित कहानी द्रौपदी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महाश्वेता देवी ने द्रौपदी को प्रतिरोध के जीवंत प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनका साहित्य सत्ता संरचनाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की आलोचनात्मक पड़ताल करता है।
🎓 विद्यार्थियों को मिला नया दृष्टिकोण
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. लालसा यादव ने की। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में शामिल कहानी “बायन” विद्यार्थियों को आदिवासी विमर्श समझने का अवसर देती है।



