अन्नपूर्णा रसोई योजना: राजस्थान में भूख से लड़ाई का मजबूत हथियार, करोड़ों को मिला सम्मानजनक भोजन

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भूख के खिलाफ मजबूत पहल

राजस्थान में अन्नपूर्णा रसोई योजना सुशासन और संवेदनशीलता की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरी है।

यह योजना गरीब, श्रमिक और जरूरतमंद वर्ग को सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विस्तार

भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में इस योजना को नई गति मिली है।

सरकार ने इसे केवल भोजन वितरण तक सीमित न रखकर पोषण और गुणवत्ता से भी जोड़ा है।

अब ज्यादा पोषण और बेहतर थाली

योजना के तहत अब भोजन की मात्रा 450 ग्राम से बढ़ाकर 600 ग्राम कर दी गई है।

थाली में शामिल हैं—

  • दाल
  • सब्जी
  • चावल
  • बाजरा (श्री अन्न) की खिचड़ी
  • चपाती और अचार

👉 साथ ही प्रति थाली अनुदान 17 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये किया गया है।

मिलेट्स को बढ़ावा

इस योजना में बाजरा और ज्वार जैसे श्री अन्न को शामिल किया गया है, जिससे—

  • लोगों को पोषण मिल रहा है
  • किसानों को भी फायदा हो रहा है

पूरे प्रदेश में विस्तार

राज्य के 230 नगरीय निकायों में 992 अन्नपूर्णा रसोई संचालित हो रही हैं।

इसके अलावा 79 नए निकायों में भी रसोई शुरू करने की प्रक्रिया जारी है।

करोड़ों लोगों को मिला लाभ

अब तक लगभग 11.94 करोड़ भोजन थालियां परोसी जा चुकी हैं।

👉 इससे यह साफ है कि अन्नपूर्णा रसोई योजना केवल एक योजना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सम्मान का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

सुशासन की पहचान

👉 कुल मिलाकर, यह योजना भूख मिटाने के साथ-साथ आत्मसम्मान, पोषण और समावेशी विकास का प्रतीक बन गई है।

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