🔹 Assam CM Hate Speech Case सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
असम के मुख्यमंत्री के बयान को लेकर कानूनी विवाद तेज हो गया है।
Assam CM Hate Speech Case में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।
🔹 जमीअत उलमा-ए-हिंद की याचिका
जमीअत उलमा-ए-हिंद
ने अपने अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के माध्यम से याचिका दाखिल की।
याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
के एक सार्वजनिक बयान पर आपत्ति जताई गई है।
🔹 विवादित बयान का उल्लेख
याचिका में 27 जनवरी 2026 के भाषण का हवाला दिया गया है।
इस भाषण में एक समुदाय के वोटर्स को हटाने की बात कही गई थी।
जमीअत का कहना है कि प्रयुक्त शब्द अपमानजनक है।
यह बयान सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देता है।
Assam CM Hate Speech Case में इसे गंभीर आरोप बताया गया है।
🔹 संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में कहा गया कि यह बयान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है।
बल्कि यह समानता और भाईचारे के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी भाषा अपेक्षित नहीं है।
इससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचता है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग
जमीअत ने सुप्रीम कोर्ट
से सख्त दिशा-निर्देश तय करने की अपील की है।
मांग की गई है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए नियम हों।
ताकि कोई भी नफरती भाषण न दे सके।
🔹 पहले से लंबित याचिका से जुड़ा मामला
यह याचिका पहले से लंबित हेट स्पीच मामले से जोड़ी गई है।
सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला सुरक्षित रख चुका है।
🔹 निष्कर्ष
Assam CM Hate Speech Case संवैधानिक जवाबदेही का अहम सवाल उठाता है।
अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।




