उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में स्थित औरैया–फफूंद फोरलेन मार्ग बीते कई वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। यह मार्ग कस्बा फफूंद को जिला मुख्यालय से जोड़ता है, लेकिन अधूरे निर्माण और जर्जर हालत के कारण राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, टूटी परतें और अधूरे पुल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों को रोजाना धूल, जाम और आवागमन की समस्या झेलनी पड़ रही है।
📅 कब शुरू हुई थी परियोजना?
यह परियोजना वर्ष 2015–16 में स्वीकृत हुई थी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण भी शुरू हुआ, लेकिन बजट की कमी और भूमि मुआवजा विवाद के चलते काम रुक गया। देवरपुर, शेरपुर सरैया और वमूंपुर गांवों के कुछ लोगों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसमें से एक मामला अब भी अदालत में लंबित है।
इसके बाद 2018–19 में कार्य पूरी तरह बंद हो गया। कोविड-19 महामारी ने भी काम शुरू होने में और देरी कर दी।
💰 लागत बढ़कर 125 करोड़
शुरुआत में इस परियोजना की लागत करीब 112 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब जीएसटी लागू होने और समय बीतने के कारण इसे बढ़ाकर 125 करोड़ रुपये कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग ने संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली।
🚧 18 किलोमीटर लंबा मार्ग
इस फोरलेन मार्ग की लंबाई लगभग 18 किलोमीटर है, जिस पर रोजाना 800 से 1000 वाहन गुजरते हैं। पढ़ीन गांव के पास पुल की अप्रोच रोड अभी भी अधूरी है, जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है।
🗣️ ग्रामीणों की पीड़ा
ग्राम प्रधान पिंकू यादव ने बताया कि अधूरी सड़क के कारण लोगों को धूल, गंदगी और ट्रैफिक की परेशानी झेलनी पड़ रही है। व्यापार और आवागमन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
🏗️ प्रशासन का बयान
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अमर सिंह ने बताया कि परियोजना का प्रस्ताव दोबारा शासन को भेजा गया है और मंजूरी मिलते ही काम फिर शुरू कराया जाएगा।




