बीएचयू संगोष्ठी में बड़ा दावा—“पदार्थ विज्ञान और न्याय दर्शन दोनों परमाणु को मानते हैं मूल तत्व”

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बीएचयू में वैदिक विज्ञान पर मंथन

वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित वैदिक विज्ञान संगोष्ठी के दूसरे दिन महत्वपूर्ण विचार सामने आए।

इस त्रि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों ने भाग लिया।

“विज्ञान और न्याय दर्शन में समानता”

प्रो. रामनाथ झा ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक पदार्थ विज्ञान और भारतीय न्याय दर्शन दोनों ही परमाणु को मूल तत्व मानते हैं।

उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित है, जबकि पश्चिमी परंपरा तार्किक विश्लेषण पर केंद्रित है।

क्वांटम भौतिकी और वेदों का संबंध

प्रो. झा ने क्वांटम भौतिकी का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है।

उन्होंने इसे भगवान श्रीकृष्ण के उस सिद्धांत से जोड़ा, जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि के परस्पर संबंध की बात कही गई है।

यज्ञ विज्ञान पर भी जोर

बीएचयू के प्रो. उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यज्ञ विज्ञान में संपूर्ण सृष्टि समाहित है।

उन्होंने अग्निहोत्र को जीवन और ब्रह्मांड के संतुलन का आधार बताया।

देश-विदेश के विद्वानों की भागीदारी

संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

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