बंगाल में राहत रोकी गई! जानिए कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश ने कैसे मचाया सियासी तूफान

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हाई कोर्ट की रोक से हिली ममता सरकार, राहत योजना पर सियासी घमासान शुरू

कोलकाता, 20 जून (हि.स.) — पश्चिम बंगाल सरकार की राहत योजना पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाकर सियासी हलचल तेज कर दी है। कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद टीएमसी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए न्यायिक लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।

क्या है मामला?

राज्य सरकार ने 2016 की अवैध भर्ती प्रक्रिया के चलते बर्खास्त किए गए गैर-शिक्षण कर्मियों को राहत देने के लिए योजना शुरू की थी। योजना के अंतर्गत:

  • ग्रुप ‘C’ कर्मियों को ₹25,000
  • ग्रुप ‘D’ कर्मियों को ₹20,000

की एकमुश्त सहायता राशि दी जानी थी। मगर कुछ याचिकाकर्ताओं ने इसे कोर्ट में चुनौती दी।

कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने आदेश में कहा कि योजना को 26 सितंबर या अगले आदेश तक लागू नहीं किया जा सकता।
यह आदेश राज्य सरकार को झटका है, क्योंकि योजना को “मानवीय सहायता” बताते हुए लागू किया गया था।

टीएमसी का विरोध पर हमला

टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“26 हजार परिवारों की परेशानी पर कुछ राजनीतिक ताकतों को आनंद आया है। हमारी सरकार उनके साथ है।”

घोष ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लंबित है और नई भर्ती प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

राज्य सरकार क्या कहती है?

  • योजना अस्थायी थी।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत की गई सेवा समाप्ति के बाद मानवीय दृष्टिकोण से यह राहत दी गई थी।
  • योजना किसी भी न्यायिक निर्देश के अधीन थी।

आगे की कानूनी लड़ाई

  • राज्य सरकार को 4 सप्ताह में कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा।
  • याचिकाकर्ता 2 सप्ताह में पलटवार कर सकते हैं।
  • टीएमसी ने साफ कर दिया है कि वो न्यायिक लड़ाई नहीं छोड़ेगी

राजनीतिक मायने क्या हैं?

यह रोक केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि बंगाल की सियासी जंग का हिस्सा बन चुकी है।
ममता बनर्जी सरकार इसे जनहित का मुद्दा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे न्यायिक जीत के रूप में पेश कर रहा है।

🔚 निष्कर्ष

अब यह देखना होगा कि क्या ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में इस आदेश को पलटवा पाती है या नहीं। फिलहाल तो यह आदेश टीएमसी की छवि और राहत योजना दोनों के लिए एक बड़ा झटका है।

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