🔹 Chambal Wildlife Revival की नई पहचान
कभी डकैतों के लिए कुख्यात रहा चंबल क्षेत्र अब जीवन का प्रतीक बन चुका है।
आज Chambal Wildlife Revival संकटग्रस्त जलीय जीवों के लिए उम्मीद है।
🔹 तीन राज्यों में फैला चंबल क्षेत्र
करीब 435 किलोमीटर लंबा चंबल क्षेत्र राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला है।
यह क्षेत्र अब जैव विविधता का सुरक्षित घर बन रहा है।
🔹 राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की भूमिका
1979 में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की स्थापना हुई।
इसके बाद संरक्षण कार्यों को नई दिशा मिली।
🔹 घड़ियाल और डॉल्फिन की बढ़ती संख्या
Chambal Wildlife Revival के कारण घड़ियालों की संख्या ढाई गुना बढ़ी है।
आज दुनिया के करीब 80 प्रतिशत घड़ियाल चंबल में पाए जाते हैं।
डॉल्फिन और मगरमच्छों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
यह साफ पानी और सुरक्षित वातावरण का संकेत है।
🔹 कछुए और इंडियन स्कीमर का संरक्षण
चंबल में कछुओं की आठ प्रजातियां मौजूद हैं।
इनकी संख्या लगभग 15,000 तक पहुंच चुकी है।
इंडियन स्कीमर जैसे संकटग्रस्त पक्षी भी यहां प्रजनन करते हैं।
यह Chambal Wildlife Revival की बड़ी उपलब्धि है।
🔹 सरकारी योजनाओं से मिला बल
सरकार की Integrated Development of Wildlife Habitat योजना लागू है।
इसके तहत निगरानी, रेस्क्यू और पुनर्वास किया जाता है।
🔹 जन जागरूकता से घटा संघर्ष
नदी किनारे बसे गांवों में लोगों को लगातार जागरूक किया जाता है।
इससे मानव और वन्यजीव संघर्ष में कमी आई है।
🔹 ईको टूरिज्म का नया केंद्र
चंबल क्षेत्र ईको टूरिज्म के लिए आदर्श बन रहा है।
बोटिंग और पक्षी दर्शन पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
🔹 शुद्ध जल बना सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञों के अनुसार औद्योगिक प्रदूषण न होने से जल निर्मल है।
इसी कारण Chambal Wildlife Revival संभव हो सका है।




