भारत में हरित सड़क निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।
CSIR-CRRI और CSIR-IIP द्वारा विकसित बायो-बिटुमेन तकनीक को आज औपचारिक रूप से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को सौंप दिया गया।
यह तकनीक धान की पराली और अन्य कृषि अपशिष्ट को सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले बिटुमेन में बदलती है, जिससे
✔ प्रदूषण घटेगा
✔ कच्चे तेल का आयात कम होगा
✔ किसानों की आमदनी बढ़ेगी
🇮🇳 भारत बना बायो-बिटुमेन बनाने वाला दुनिया का पहला देश
नितिन गडकरी ने कहा:
“भारत दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने बायो-बिटुमेन का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया है। अगर 15% मिश्रण अपनाया जाए तो देश सालाना ₹4,500 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।”
यह तकनीक विकसित भारत 2047 विज़न से जुड़ी हुई है और
भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी।
🌱 पराली से बनेगी सड़क
इस तकनीक में धान की पराली को पायरोलिसिस प्रक्रिया से तीन उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है:
| उत्पाद | उपयोग |
|---|---|
| बायो-तेल | बायो-बिटुमेन बनाने में |
| बायो-गैस | संयंत्र चलाने में |
| बायो-चारकोल | जैव-खाद के रूप में |
👉 पूरी प्रक्रिया Zero-Waste (शून्य अपशिष्ट) आधारित है।
👩🌾 किसानों और महिलाओं को सीधा लाभ
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार
घर-घर से इस्तेमाल किया हुआ तेल ₹20 प्रति किलो में खरीदेगी,
जिससे
✔ महिलाएं सशक्त होंगी
✔ ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
🧠 वैज्ञानिक दृष्टि से बड़ा कदम
CSIR की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी ने कहा कि
यह परियोजना विज्ञान + सरकार + समाज के सामूहिक प्रयास का उदाहरण है।
इसमें CSIR की कई लैब, IIT और अन्य संस्थान शामिल हैं।
🚧 अब भारत की सड़कें होंगी ग्रीन
इस तकनीक से:
- पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण घटेगा
- सड़क निर्माण टिकाऊ बनेगा
- आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता घटेगी
यह नवाचार भारत को ग्रीन हाईवे टेक्नोलॉजी में वैश्विक लीडर बना सकता है।




