नई दिल्ली में सोमवार को दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम फैसले पर राज्य की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मुख्य आरोपियों शरजीत इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“जिन लोगों ने दिल्ली को दंगों की आग में झोंकने का काम किया, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, जिन राजनीतिक दलों ने ऐसा समर्थन दिया, उन्हें भी इसका कड़ा संदेश मिला है।”
🧑⚖️ अदालत का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी शरजीत इमाम और उमर खालिद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की जा रही हैं। अदालत ने इस मामले में प्रक्रिया और साक्ष्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए यह स्पष्ट किया कि फिरौती/उकसावे से जुड़े आरोप सही ढंग से जांच के दायरे में हैं।
हालांकि कोर्ट ने 5 अन्य आरोपितों को जमानत प्रदान की है, जिनके खिलाफ आरोपों का परीक्षित स्तर और परिस्थितियां भिन्न मानी गईं।
🧵 राजनीतिक और विधिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के स्वागत के बयान से साफ है कि राज्य सरकार इस फैसले को न्याय का प्रतीक मानती है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहां सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भावनाओं को गंभीर प्रभावित किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न केवल न्यायिक संतुलन को परिभाषित करता है, बल्कि भविष्य में दंगों से प्रेरित अलगाववाद और उकसावे आधारित अपराधों के खिलाफ भी मायने रखता है।




