कड़ी सुरक्षा के बीच नेपाल से देवीपाटन मंदिर पहुंची प्रसिद्ध पीर नाथ योगी की धार्मिक यात्रा

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बलरामपुर, 2 अप्रैल (हि.स.)। चैत्र नवरात्रि की पंचमी को नेपाल से आने वाली प्रसिद्ध पीर रतननाथ योगी की धार्मिक यात्रा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नेपाल सीमा क्षेत्र के जनकपुर मंदिर से देवीपाटन शक्तिपीठ पहुंची। इस शोभायात्रा में शामिल होने के लिए नेपाल से हजारों श्रद्धालु जनकपुर पहुंचे और यात्रा में भाग लिया। पात्र देवता के दर्शन के लिए श्रद्धालु मध्य रात्रि से ही सड़क के दोनों किनारों पर आस्था के फूल लिए जुटे रहे।

आज बुधवार सुबह लगभग 6:00 बजे पात्र देवता रतन नाथ योगी की धार्मिक यात्रा नेपाल सीमा के जनकपुर मंदिर से पैदल प्रस्थान कर तुलसीपुर नगर के नकटी नाला पहुंची। वहां नगरवासियों ने शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया और पात्र देवता की पूजा-अर्चना की। नेपाल से आए श्रद्धालुओं का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। एसडीएम तुलसीपुर की अगुवाई में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यात्रा नगर भ्रमण करते हुए पारंपरिक ढंग देवीपाटन मंदिर पहुंची। वहां देवीपाटन पीठाधीश्वर मिथलेश नाथ योगी ने पात्र देवता व मुख्य पुजारी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माल्यार्पण कर स्वागत किया। माता के मुख्य मंदिर में पूजन के बाद मुख्य पुजारी ने मां पाटेश्वरी के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना की गई।

इस भव्य शोभायात्रा में हाथी भी शामिल थे। नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने भारत-नेपाल की साझा संस्कृति की झलक लोक नृत्य और झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया। नगर में यात्रा के स्वागत में जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई, वहीं पैराशूट मोटर के जरिए आसमान से भी पुष्प वर्षा की गई । जिससे यात्रा में चल रहे श्रद्धालु हर्षित रहे। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

पीर रतननाथ योगी की यह धार्मिक यात्रा युगों-युगों से चली आ रही है। हर वर्ष चैत्र नवरात्रि की पंचमी को यह यात्रा देवीपाटन मंदिर पहुंचती है। मान्यता है कि नेपाल के रतननाथ योगी की तपस्या से प्रसन्न होकर माता पाटेश्वरी ने उन्हें दर्शन दिए थे। उनके अनुरोध पर माता ने उन्हें ही पूजन का अधिकार दिया, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। रतननाथ योगी के शरीर त्यागने के बाद भी उनकी पात्र देवता के रूप में यह यात्रा जारी रहती है, जिसमें उनके मुख्य पुजारी पंचमी से नवमी तिथि तक पूजन करते हैं। नवमी तिथि के दिन पूजन प्रक्रिया बदल जाती है और इसके बाद देवीपाटन मंदिर के पुजारी पूजन संपन्न कराते हैं।

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