संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत का विशेष संदेश देश के युवाओं को

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डा. मोहन भागवत का संदेश देश के युवाओं को

भारतीय संघ से जुड़े एक महत्वपूर्ण नाम डा. मोहन भागवत जी का है, जो वर्तमान में संघ के सरसंघचालक हैं। उनका जन्म 11 सितंबर 1950 को मध्य प्रदेश के जूनागढ़ में हुआ था। डा. भागवत जी ने अपनी शिक्षा मध्य प्रदेश के पं. मान्यलाल विद्यालय से की। उन्होंने श्री अरविंद आश्रम से भी पढ़ाई की।

शिक्षा और करियर

डा. मोहन भागवत जी ने अपने प्रारंभिक जीवन में ही शिक्षा के प्रेम को दिखाया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी शुरुआत किया। उन्होंने विविध विषयों पर पुस्तकें लिखीं। उनकी पुस्तक “डॉ. हेडगेवार: एक संक्षिप्त जीवनी” में उनकी शिक्षा की प्रतिभा स्पष्ट हो जाती है।

संघ से जुड़ाव

डा. मोहन भागवत जी ने 1967 में भारतीय संघ से जुड़े। उन्होंने 1970 में शिविर के कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं। डा. भागवत जी ने 1983 में संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया। उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में पदोन्नत किया गया।

सरसंघचालक

डा. मोहन भागवत जी को 2000 में संघ के संघचालक के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने 13 सितंबर 2000 को अपने पद की शपथ ली। डा. भागवत जी ने अपने कार्यकाल में संघ के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सामाजिक सेवा

डा. मोहन भागवत जी की सामाजिक सेवा की भावना को देखते हुए उन्होंने कई सामाजिक कार्यों में भाग लिया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए। डा. भागवत जी ने सामाजिक सेवा के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए।

निष्कर्ष

डा. मोहन भागवत जी का जीवन एक प्रेरणा है। उनकी शिक्षा, करियर और सामाजिक सेवा की भावना ने उन्हें भारतीय संघ के सरसंघचालक के रूप में पदोन्नत किया। उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा।