फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट रैकेट: एसओजी ने विदेश से एमबीबीएस कर लौटे तीन और फर्जी डॉक्टर दबोचे

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एसओजी ने विदेशी डॉक्टरों को दबोचा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक अभियान में तीन फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने विदेश में एमबीबीएस कर लौटकर भारत में डॉक्टरी प्रैक्टिस करने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिए थे।

फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी

एसओजी के अधिकारियों ने बताया कि तीन फर्जी डॉक्टरों को उनके ठिकानों पर छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया है। इनमें से दो फर्जी डॉक्टरों की पहचान विदेश से एमबीबीएस कर लौटे रोहन अग्रवाल और श्रेयस शर्मा के रूप में हुई है, जबकि तीसरे फर्जी डॉक्टर का नाम अमन सिंह है। इन्हें फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए एक विशेष संगठन से जोड़कर पाया गया है।

फर्जी सर्टिफिकेट का खेल

एसओजी के अधिकारियों ने बताया कि फर्जी डॉक्टरों ने विदेश से एमबीबीएस कर लौटकर भारत में डॉक्टरी प्रैक्टिस करने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट प्राप्त किए थे। इन सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के लिए उन्होंने एक विशेष संगठन से संपर्क किया था, जो फर्जी सर्टिफिकेट प्रदान करने का काम करता था। इन सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के लिए उन्हें कुछ रुपए देने पड़ते थे, जो कि एक बड़ा रैकेट था।

फर्जी डॉक्टरों की पहचान

एसओजी के अधिकारियों ने बताया कि फर्जी डॉक्टरों की पहचान करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया था। इस अभियान में एसओजी के अधिकारियों ने कई दिनों तक फर्जी डॉक्टरों की पहचान करने के लिए काम किया था। अंत में उन्हें तीन फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है।

एसओजी की कार्रवाई

एसओजी के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में उन्होंने फर्जी डॉक्टरों के ठिकानों पर छापेमारी की और उन्हें गिरफ्तार किया। अब इन फर्जी डॉक्टरों को जेल भेजा जाएगा और उन पर मामला दर्ज किया जाएगा।

निष्कर्ष

यह मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़ा मामला है, जिसमें फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। एसओजी ने तीन फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने विदेश में एमबीबीएस कर लौटकर भारत में डॉक्टरी प्रैक्टिस करने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिए थे। यह मामला डॉक्टरी प्रैक्टिस के क्षेत्र में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक बड़ा कदम है।

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