गुरु-पुष्य नक्षत्र पर गणेशमय हुई छोटी काशी
वाराणसी, 18 जून (वार्ता) – गुरु-पुष्य नक्षत्र पर छोटी काशी गणेशमय हो गई। इस अवसर पर मंदिरों में पंचामृत अभिषेक और मोदकों का भोग किया गया। यह नक्षत्र भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
मंदिरों में गणेश पूजा का आयोजन
वाराणसी के विभिन्न मंदिरों में गुरु-पुष्य नक्षत्र पर गणेश पूजा का आयोजन किया गया। इनमें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, श्री गंगा मैया मंदिर, श्री दुर्गा मंदिर और श्री गणेश मंदिर शामिल थे। इन मंदिरों में भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष पंडाल लगाए गए थे।
पंचामृत अभिषेक और मोदकों का भोग
मंदिरों में गणेश पूजा के दौरान पंचामृत अभिषेक और मोदकों का भोग किया गया। पंचामृत अभिषेक में पंचामृत को भगवान गणेश के मंदिर में छिड़का गया। इसके बाद मोदकों का भोग किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के मोदक बनाए गए थे। इन मोदकों को भगवान गणेश को चढ़ाया गया।
स्थानीय लोगों ने गणेश पूजा में भाग लिया
वाराणसी के स्थानीय लोगों ने गुरु-पुष्य नक्षत्र पर गणेश पूजा में भाग लिया। इन लोगों ने भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष पूजा सामग्री खरीदी और पूजा के लिए तैयार हुए। स्थानीय लोगों ने भगवान गणेश को पंचामृत और मोदक चढ़ाए और उनकी पूजा की।
गणेश पूजा का महत्व
गुरु-पुष्य नक्षत्र पर गणेश पूजा का बहुत महत्व है। भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति को शुभता और समृद्धि मिलती है। गणेश पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इसलिए, लोग गुरु-पुष्य नक्षत्र पर गणेश पूजा करने के लिए विशेष तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
गुरु-पुष्य नक्षत्र पर गणेशमय हुई छोटी काशी। मंदिरों में पंचामृत अभिषेक और मोदकों का भोग किया गया। स्थानीय लोगों ने गणेश पूजा में भाग लिया और भगवान गणेश की पूजा की। गणेश पूजा करने से व्यक्ति को शुभता और समृद्धि मिलती है। इसलिए, लोग गुरु-पुष्य नक्षत्र पर गणेश पूजा करने के लिए विशेष तैयारी करते हैं।



