Hanuman Chalisa Rules: कब नहीं करना चाहिए पाठ?
🚫 1. अशुद्ध अवस्था में
सनातन परंपरा के अनुसार:
- बिना स्नान किए
- अत्यधिक गंदे वस्त्रों में
- शरीर या मन की अशुद्ध अवस्था में
हनुमान चालीसा का पाठ निषेध माना गया है।
👉 शुद्धता को पूजा का पहला नियम कहा गया है।
🌙 2. रात्रि के बहुत देर समय
कुछ शास्त्रों में माना गया है कि:
- आधी रात के बाद
- बिना विशेष साधना या संकल्प
हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए।
हालांकि संकट के समय नियमों में छूट मानी जाती है।
🩸 3. सूतक या अशौच काल में
- जन्म या मृत्यु के बाद के सूतक काल में
- मासिक धर्म के समय (परंपरागत मान्यताओं के अनुसार)
पाठ से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
👉 यह नियम परंपरा आधारित है, क्षेत्र और कुलाचार के अनुसार भिन्न हो सकता है।
😡 4. क्रोध, नकारात्मकता या अहंकार की अवस्था में
हनुमान जी भक्ति और विनम्रता के प्रतीक हैं।
अगर मन में:
- गुस्सा
- द्वेष
- अहंकार
भरा हो, तो पाठ का पूर्ण फल नहीं मिलता।
👉 पहले मन को शांत करना आवश्यक माना गया है।
🪔 5. बिना श्रद्धा या मजाक के भाव से
- दिखावे के लिए
- मजाक या प्रयोग के तौर पर
- बिना आस्था के
हनुमान चालीसा का पाठ करना
👉 शास्त्रों में अनुचित बताया गया है।
✅ Hanuman Chalisa पाठ के सही Rules
हनुमान जी की कृपा पाने के लिए:
- स्नान कर साफ वस्त्र पहनें
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें
- दीपक या अगरबत्ती जलाएं
- शांत और एकाग्र मन से पाठ करें
- पाठ के बाद क्षमा प्रार्थना करें
🌺 मंगलवार को विशेष महत्व क्यों?
माना जाता है कि मंगलवार:
- हनुमान जी की ऊर्जा का दिन है
- भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है
- आत्मबल और साहस बढ़ाता है
इसीलिए इस दिन किया गया पाठ
👉 अधिक फलदायी माना जाता है।
🧠 शास्त्रों का संदेश क्या है?
हनुमान चालीसा कोई मंत्र मात्र नहीं,
👉 यह भक्ति, अनुशासन और आत्मशुद्धि का मार्ग है।
नियमों का उद्देश्य डर नहीं,
बल्कि श्रद्धा और मर्यादा बनाए रखना है।





