🔹 हाईकोर्ट का सख्त रुख
राजस्थान हाईकोर्ट ने High Court bank freeze ruling में पुलिस की मनमानी पर रोक लगाई।
अदालत ने कहा कि संदेह के आधार पर पूरा बैंक खाता फ्रीज अवैध है।
🔹 मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खाता फ्रीज करने से पहले मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी है।
पुलिस केवल विवादित राशि पर लियन लगा सकती है, पूरा खाता नहीं।
🔹 बीएनएसएस की व्याख्या
न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने बीएनएसएस धारा 106 और 107 की व्याख्या की।
धारा 106 सीमित जब्ती देती है, जबकि फ्रीजिंग केवल मजिस्ट्रेट के आदेश से होगी।
🔹 पुलिस की अधिकता पर सवाल
अदालत ने कहा कि साइबर मामलों में पुलिस अक्सर जरूरत से ज्यादा कार्रवाई करती है।
पिछले साल 80% मामलों में पुलिस ने खुद ही कठोर कदम उठाए।
🔹 बैंकिंग प्रणाली पर असर
कोर्ट ने कहा कि भुगतान व्यवस्था आरबीआई कानून से नियंत्रित होती है।
पुलिस अपने विवेक से खातों को फ्रीज नहीं कर सकती।
🔹 हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश
- साइबर जांच कम से कम एएसआई स्तर का अधिकारी करेगा।
- बैंक से जानकारी लेने से पहले एसपी की मंजूरी जरूरी होगी।
- पुलिस सीधे बैंक को खाता फ्रीज करने का आदेश नहीं देगी।
- 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य होगा।
🔹 आम नागरिकों को राहत
High Court bank freeze ruling से निर्दोष लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
अब बिना कानूनी प्रक्रिया बैंक खाते ब्लॉक नहीं होंगे।
🔹 बैंकों की जिम्मेदारी तय
यदि बैंक पुलिस के अवैध अनुरोध पर खाता फ्रीज करता है, तो वह जिम्मेदार होगा।
बैंक को नुकसान और मानहानि की भरपाई करनी पड़ सकती है।
🔹 साइबर अपराध में संतुलन
High Court bank freeze ruling ने जांच और अधिकारों में संतुलन बनाया है।
पुलिस कार्रवाई होगी, लेकिन मनमानी नहीं चलेगी।




