हिमाचल में जियोडेटिक रजिस्टर और मैप जारी, आपदा प्रबंधन और विकास योजनाओं को मिलेगी नई गति

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शिमला, 12 दिसंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश ने भू-स्थानिक तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए शुक्रवार को राज्य का जियोडेटिक रजिस्टर और जियोडेटिक मैप जारी किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के.के. पंत ने इसका विमोचन किया। यह रजिस्टर भू-स्थानिक निदेशालय पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ के निदेशक गौरव कुमार सिंह द्वारा तैयार किया गया है।

रजिस्टर में हिमाचल की भू-सर्वेक्षण अधोसंरचना को छह मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है—

  1. सतत संचालन संदर्भ स्टेशन
  2. ग्रेट ट्रिग्नोमैट्रिक सर्वे स्टेशन
  3. ग्राउंड कंट्रोल प्वाइंट्स
  4. मैग्नेटिक रेफ्रेंस स्टेशन
  5. ग्रैविटी रेफ्रेंस स्टेशन
  6. लेवलिंग बेंचमार्क

ये सभी उच्च तकनीकी बिंदु भूमि मापन, वैज्ञानिक विश्लेषण और योजनागत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव पंत ने कहा कि जियोडेटिक एसेट्स मैप राज्य के भू-स्थानिक संसाधनों का विस्तृत रिकॉर्ड प्रस्तुत करता है। हिमाचल की जटिल भौगोलिक बनावट और आपदा-संवेदनशीलता को देखते हुए यह दस्तावेज आपदा प्रबंधन, भू-अध्ययन और भविष्य की रणनीतियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहेगा।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश भूस्खलन, भूकंप और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं के खतरे से घिरा रहता है। ऐसे में सटीक भू-डेटा से जोखिम विश्लेषण, संरचनात्मक सुरक्षा और वैज्ञानिक आधार पर विकास कार्यों की योजना बनाना आसान होगा।

पंत ने बताया कि राजस्व विभाग लगातार आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ा रहा है। गांवों के नक्शे पोर्टल पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं और भू-नक्शा व स्वामित्व परियोजनाओं में भी इस डेटा का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जनता को पारदर्शी और तेज सेवाएं मिल रही हैं।

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