ईरान में महंगाई के खिलाफ भड़की चिंगारी बनी बगावत, पवित्र शहर कोम में खामेनेई शासन के खिलाफ गूंजे नारे

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🔥 ईरान में महंगाई बनी जनआक्रोश की वजह

ईरान में बढ़ती महंगाई और डॉलर के मुकाबले गिरते रियाल ने देश को अशांति की आग में झोंक दिया है। राजधानी तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब देशभर में फैल चुका है। पांचवें दिन हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।

🕌 पवित्र शहर कोम में पहली बार शासन विरोधी नारे

शिया इस्लाम का प्रमुख केंद्र और इस्लामिक गणराज्य का गढ़ माने जाने वाले कोम शहर में पहली बार अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे गूंजे।
प्रदर्शनकारियों ने—
“तानाशाह मुर्दाबाद”
और
“यह आखिरी लड़ाई है”
जैसे नारे लगाए।

सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कोम में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई।

💥 देशभर में हिंसक झड़पें

तेहरान, मशहद, इस्फ़हान, लोरेस्टान, खुज़ेस्तान, कज्विन और कुहदाश्त सहित कई शहरों में रातभर विरोध जारी रहा। सरकारी इमारतों, न्यायपालिका, बैंक और धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाया गया।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार—

  • गवर्नर ऑफिस
  • शहीद फाउंडेशन
  • शुक्रवार नमाज़ परिसर
  • कई बैंक
    पर पथराव और तोड़फोड़ हुई।

पुलिस ने आंसू गैस और गोलियों से भीड़ को तितर-बितर किया।

🩸 मरने वालों की संख्या बढ़ी

ईरान इंटरनेशनल और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार—

  • फूलदशहर
  • कुहदाश्त
  • लोरदेगान
  • अराक
  • केरमानशाह
    में झड़पों में कम से कम 6 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है।

कुहदाश्त में एक बासिज अर्धसैनिक बल का सदस्य भी मारा गया और 13 घायल हुए।

🚨 महिलाओं की गिरफ्तारी

मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, तेहरान में गिरफ्तार की गई 6 महिलाओं को एविन जेल के महिला वार्ड में भेजा गया है।

🌍 पांच दशकों में पहली खुली बगावत

विशेषज्ञों के अनुसार यह पिछले 50 वर्षों में पहली बार है जब ईरान के धार्मिक केंद्रों में भी सीधे खामेनेई शासन के खिलाफ खुले नारे लगे हैं। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक संकट अब राजनीतिक विस्फोट में बदल रहा है।

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