ईरान-अमेरिका तनाव खतरनाक स्तर पर
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी कीमत पर अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा। वहीं ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान अमेरिकी शर्तें नहीं मानता तो उसे अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान संसद अध्यक्ष का बड़ा बयान
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि पूरा देश युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका आर्थिक और राजनीतिक दबाव के साथ सैन्य विकल्प भी खुला रखे हुए है।
गालिबफ ने कहा कि ईरानी सेना ने संघर्ष विराम के दौरान अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत किया है। उन्होंने देशवासियों से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की।
अमेरिका की कड़ी चेतावनी
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ Stephen Miller ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान समझौते का रास्ता नहीं चुनता, तो उसे आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी कहा कि वह ईरान के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और गलत फैसला ईरान के लिए भारी पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा विवाद
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों पर अपना नियंत्रण जताते हुए वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए अनुमति अनिवार्य करने की बात कही है। ईरानी अधिकारियों ने शिपिंग कंपनियों से समन्वय और शुल्क वसूली का भी दावा किया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
अमेरिकी सेना सतर्क
अमेरिका सेंट्रल कमांड ने बताया कि ईरानी बंदरगाहों और समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अमेरिकी मरीन ने एक ईरानी टैंकर की तलाशी भी ली, जिस पर प्रतिबंधों के उल्लंघन का शक था।
अमेरिका का दावा है कि नाकाबंदी लागू करने के कारण दर्जनों कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। अगर दोनों देशों के बीच हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।



