मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों (एफपीओ) के माध्यम से शासन को 55 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक हानि पहुंचाने का मामला सामने आया है। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के निर्देश पर कृषि विभाग ने 17 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है।
जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
कृषि उप संचालक उमेश कुमार कटहरे ने बताया कि वर्ष 2023-24 के उपार्जन कार्य के दौरान दो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों ने प्रासंगिक व्यय, हैंडलिंग शुल्क और कमीशन के नाम पर अनियमित तरीके से सरकारी राशि हासिल की। जांच में कई दस्तावेज और बैंक खाते फर्जी पाए गए।
पहले मामले में 15.72 लाख रुपये की हानि
विजय नगर थाने में दर्ज मामले में बिल्किसगंज फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के छह डायरेक्टर और तीन कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने मिलकर 15 लाख 72 हजार 802 रुपये की राशि अवैध रूप से प्राप्त कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।
दूसरे मामले में 39.67 लाख रुपये का नुकसान
पाटन थाने में दर्ज दूसरे प्रकरण में बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड के छह डायरेक्टर और तीन कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेज, फर्जी नियुक्तियां और गलत रिकॉर्ड तैयार कर 39 लाख 67 हजार 781 रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।
शिकायत के बाद हुई जांच
इस पूरे मामले की शिकायत किसान मजदूर महासंघ जबलपुर के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने कलेक्टर से की थी। शिकायत के बाद गठित जांच दल ने बैंक खातों, किसानों की सूचियों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की। जांच में प्रस्तुत दस्तावेजों और खातों को फर्जी पाया गया।
कृषि विभाग ने दर्ज कराई एफआईआर
जांच रिपोर्ट के आधार पर कृषि विभाग की ओर से सहायक संचालक कृषि रवि आम्रवंशी ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस अब आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।
प्रशासन सख्त
जिला प्रशासन का कहना है कि किसानों और सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले में दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।



