भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, बलभद्र व सुभद्रा देवी के 22 विग्रह

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भगवान जगन्नाथ के 22 विग्रह

भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, बलभद्र व सुभद्रा देवी के 22 विग्रह पुरी में स्थापित किए गए हैं। यहां पर दिए गए 22 विग्रहों में से प्रत्येक का अपना महत्व है और इन्हें पुरुषोत्तम जगत के रूप में पूजा जाता है।

पुरी में भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी का महत्व

भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी के 22 विग्रहों में से दो भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी के बड़े-बड़े विग्रह हैं, जो पुरी में स्थापित किए गए हैं। भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी को श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है और उनकी पूजा देश-विदेश से लोग करते हैं।

बलभद्र व सुभद्रा देवी का महत्व

बलभद्र और सुभद्रा देवी भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी के भाई-बहन हैं। बलभद्र देवी के विग्रह को भीमा शंकर के रूप में स्थापित किया गया है, जो भगवान श्री कृष्ण का बड़ा भाई है। सुभद्रा देवी के विग्रह को ज्योतिष पुरुष के रूप में स्थापित किया गया है, जो भगवान श्री कृष्ण की बहन है।

22 विग्रहों का महत्व

पुरी में स्थापित 22 विग्रहों में से प्रत्येक का अपना महत्व है। इन विग्रहों में से कुछ भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी के बड़े-बड़े विग्रह हैं, जबकि कुछ विग्रह छोटे हैं। लेकिन सभी विग्रहों का अपना महत्व है और इन्हें पुरुषोत्तम जगत के रूप में पूजा जाता है।

पुरी में विशेष त्योहार

पुरी में हर साल कई त्योहार मनाए जाते हैं। दशहरा और रथयात्रा पुरी के सबसे विशेष त्योहार हैं। इस दौरान भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी के रथ को बड़े-बड़े उत्साह के साथ निकाला जाता है और लोगों को आकर्षित किया जाता है।

निष्कर्ष

भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, बलभद्र व सुभद्रा देवी के 22 विग्रह पुरी में स्थापित किए गए हैं। इन विग्रहों का अपना महत्व है और इन्हें पुरुषोत्तम जगत के रूप में पूजा जाता है। पुरी में स्थापित 22 विग्रहों में से प्रत्येक का अपना महत्व है और इन्हें पूजने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं।