फर्जी एफिडेविट रैकेट का खुलासा
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में जिला समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) परिसर के बाहर चल रहे कथित फर्जी एफिडेविट और दस्तावेज बनाने वाले रैकेट का शुक्रवार को खुलासा हो गया। स्थानीय अधिवक्ताओं ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को पकड़ लिया।
फोटोकॉपी दुकान की आड़ में चल रहा था खेल
जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर संचालित एक फोटोकॉपी दुकान की गतिविधियों पर अधिवक्ताओं को लंबे समय से संदेह था। जांच के दौरान दुकान से जाली मुहरें, फर्जी शपथ पत्र और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए।
तीन आरोपी पकड़े गए
मामले में अजय, राजू और घाटशिला निवासी प्रहलाद अग्रवाल को अधिवक्ताओं ने पकड़कर नए बार परिसर में लाया, जहां उनसे पूछताछ की गई। बाद में पूरे मामले की सूचना पुलिस को दी गई।
अधिवक्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप
अधिवक्ताओं का आरोप है कि दुकान में बिना किसी अधिकृत सत्यापन के जाली हस्ताक्षर और नकली मुहरों का इस्तेमाल कर एफिडेविट तैयार किए जा रहे थे।
इस कार्रवाई में अधिवक्ता विनोद कुमार मिश्रा, अमित कुमार, अनंत गोप, परमजीत श्रीवास्तव, संजीव झा, जीतराम, नीरज सिंह और अक्षय झा सहित कई लोग शामिल रहे।
पुलिस जांच में जुटी
सूचना मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस रैकेट में और कितने लोग शामिल हैं तथा अब तक कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा चुके हैं।
न्यायिक व्यवस्था पर उठे सवाल
अधिवक्ताओं ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं और अधिवक्ताओं की छवि भी खराब करती हैं। मामले को लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।



