अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले गरीबों ने खुद हटाया आशियाना – क्या यही है न्याय?

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🔸 चेतावनी मिलते ही खुद हटाया अतिक्रमण

पूर्वी सिंहभूम जिले के परसुडीह में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले ही गरीबों ने अपनी झोपड़ियां और ठेले खुद ही हटा लिए।

प्रशासन की ओर से जैसे ही नोटिस मिला, लोगों ने शांतिपूर्वक अपना सामान समेटना शुरू कर दिया।


🔸 प्रशासनिक टीम तय तिथि पर नहीं पहुंची

अचंभे की बात यह रही कि निर्धारित तारीख पर कोई प्रशासनिक अधिकारी या टीम मौके पर नहीं पहुंची।

लोग घंटों अधिकारियों का इंतजार करते रहे, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी रही।


🔸 वर्षों से रह रहे थे ये परिवार

इन लोगों का अतिक्रमण नया नहीं था। फल बेचने और छोटी दुकानों के सहारे जीवन यापन कर रहे ये परिवार वर्षों से यहीं रह रहे थे।

टीन और प्लास्टिक की छतों से बनी झोपड़ियां बारिश और धूप से बचाव का साधन थीं।


🔸 प्रशासन पर दोहरी नीति का आरोप

स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया।

उनका कहना है कि एक व्यवसायी द्वारा किए जा रहे नए अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जबकि गरीबों को तुरंत हटाया गया।


🔸 “सभी के लिए समान नियम होने चाहिए”

निवासियों ने मांग की है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अगर होनी है तो हर किसी पर समान रूप से हो।

गरीब और अमीर में फर्क करना न इंसाफ है और न ही प्रशासनिक जिम्मेदारी।


🔸 क्या कहती है सरकारी वेबसाइट?

झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी तक इस कार्रवाई को लेकर कोई अपडेट नहीं मिला है।

लोगों ने सीओ कार्यालय में शिकायत भी दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।


🔸 पहले भी उठे हैं ऐसे सवाल

हमारी पिछली रिपोर्ट में भी यही मुद्दा सामने आया था कि कार्रवाई कमजोर वर्ग पर केंद्रित होती है।

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