बॉक्स ऑफिस पर ‘केसरी: चैप्टर-2’ का जलवा बरकरार, पांच दिनों का कलेक्शन अब 38.75 करोड़ रुपये

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अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी: चैप्टर 2’ इस वक्त सिनेमाघरों में धूम मचा रही है और दर्शकों को खूब पसंद आ रही है। फिल्म को दर्शकों से शानदार रिस्पॉन्स मिला है और समीक्षकों ने भी इसकी दमदार कहानी और अक्षय कुमार के प्रभावशाली अभिनय की जमकर तारीफ की है। फिल्म ने अपने पहले तीन दिनों में बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की, लेकिन चौथे दिन इसमें अचानक गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि पांचवें दिन फिल्म के कलेक्शन में हल्का उछाल देखने को मिला, जिससे फिल्म की रफ्तार फिर से पटरी पर लौटती दिखी।

बॉक्स ऑफिस ट्रैकर सैकनिल्क के अनुसार ‘केसरी 2’ ने धीमी लेकिन स्थिर शुरुआत की है। फिल्म ने पहले दिन 7.75 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि दूसरे दिन इस आंकड़े में इजाफा हुआ और फिल्म ने 9.75 करोड़ रुपये का बिजनेस किया। तीसरे दिन यानी रविवार को फिल्म की कमाई 12 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि, सोमवार यानी चौथे दिन कलेक्शन में भारी गिरावट देखी गई और फिल्म ने सिर्फ 4.5 करोड़ रुपये कमाए। मंगलवार को फिल्म ने थोड़ी रिकवरी की और 4.75 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इस तरह ‘केसरी 2’ का कुल पांच दिनों का कलेक्शन अब 38.75 करोड़ रुपये हो चुका है। अब देखना होगा कि वीकडेज में फिल्म कितनी मजबूती से टिकती है और दूसरे वीकेंड में इसका परफॉर्मेंस कैसा रहता है।

‘केसरी 2’ को करण सिंह त्यागी ने डायरेक्ट किया है, जबकि इसके निर्माता हैं करण जौहर। यह फिल्म सिर्फ एक ऐतिहासिक ड्रामा नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक बायोपिक भी है जो भारतीय इतिहास के एक अहम और साहसी अध्याय को पर्दे पर लाती है। इस फिल्म में अक्षय कुमार सी. शंकरन नायर की भूमिका निभा रहे हैं। जो एक प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई लड़ी थी, जिसमें उन्होंने जनरल डायर की भूमिका को दुनिया के सामने लाने का बीड़ा उठाया। फिल्म में अनन्या पांडे और आर. माधवन भी अहम किरदारों में हैं। अनन्या एक पत्रकार के रोल में हैं, जो नायर की लड़ाई में उनका साथ देती हैं, जबकि आर. माधवन एक ब्रिटिश अफसर की भूमिका निभा रहे हैं जो फिल्म में मुख्य विरोधी ताकत के रूप में नजर आता है। इतिहास, न्याय और साहस के मेल से बनी यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है और भारतीय कानूनी इतिहास के एक सुनहरे पन्ने को दर्शाती है।

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