कोलकाता में ठंड बढ़ते ही घनी धुंध और जहरीली हवा, प्रदूषण से सांस लेना हुआ मुश्किल

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कोलकाता में जैसे-जैसे तापमान गिर रहा है, वैसे-वैसे शहर की हवा और ज़्यादा ज़हरीली होती जा रही है। घनी धुंध और स्थिर हवा के कारण वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस के रोगियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

🌫️ धुंध के साथ फंसा जहरीला धुआं

नए साल की रात हुई आतिशबाजी के बाद से ही हवा में प्रदूषण बढ़ने लगा था। इसके बाद लगातार पारा गिरने से शहर धुंध की मोटी चादर में लिपट गया। ठंडी और भारी हवा के कारण पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषण कण जमीन के पास ही फंस गए, जिससे स्मॉग की स्थिति बन गई।

सुबह ही नहीं, बल्कि दोपहर तक शहर के कई हिस्सों में धुंध छाई रह रही है, जिससे दृश्यता कम हो रही है और सांस लेना कठिन हो गया है।

📊 पीएम 2.5 300 के पार

बुधवार को कोलकाता और हावड़ा के कई इलाकों में पीएम 2.5 का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर रिकॉर्ड किया गया।
जादवपुर इलाके में AQI 275 से 305 के बीच रहा, जबकि रवींद्रभारती विश्वविद्यालय क्षेत्र में यह 316 तक पहुंच गया। बालीगंज में भी AQI 300 के करीब बना हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है।

🚨 स्वास्थ्य पर गंभीर असर

विशेषज्ञों के अनुसार इतनी खराब हवा से दमा, ब्रोंकाइटिस और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अस्पतालों में सांस की तकलीफ वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

🧯 खुले में आग जलाना भी वजह

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में लोग खुले में लकड़ी, कोयला और प्लास्टिक जलाते हैं, जिससे धुंआ और जहरीली गैसें हवा में घुल जाती हैं। स्थिर मौसम के कारण यह धुंआ फैलने के बजाय शहर के ऊपर ही अटका रहता है।

🏙️ निगम की कोशिशें बेअसर

कोलकाता नगर निगम अत्यधिक प्रदूषित इलाकों में पानी का छिड़काव कर धूल को कम करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक खुले में आग जलाने पर सख्ती नहीं होगी, तब तक हालात में सुधार मुश्किल है।

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