कोरबा में 1600 मेगावाट विस्तार पर घमासान, जनसुनवाई से पहले उठे पर्यावरणीय सवाल

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🔹 जनसुनवाई से पहले बढ़ा विरोध

कोरबा में प्रस्तावित कोरबा 1600 मेगावाट विस्तार परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

🔹 प्रदूषण पर चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरबा पहले से ही ताप विद्युत संयंत्रों और खनन गतिविधियों के कारण प्रदूषण की मार झेल रहा है। ऐसे में अतिरिक्त 1600 मेगावाट क्षमता जुड़ने से वायु गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) में संचयी प्रभाव का पर्याप्त और पारदर्शी विश्लेषण नहीं किया गया।

🔹 जल संकट का मुद्दा

परियोजना के लिए हसदेव नदी से प्रतिवर्ष लगभग 86 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी लेने का प्रस्ताव है। किसानों का कहना है कि गर्मी के दौरान पहले ही जल संकट रहता है, ऐसे में अतिरिक्त जल दोहन से पेयजल और सिंचाई प्रभावित हो सकती है।

🔹 फ्लाई ऐश और स्वास्थ्य सवाल

राख (फ्लाई ऐश) प्रबंधन पर भी सवाल उठ रहे हैं। दस्तावेजों में 100 प्रतिशत उपयोग का दावा किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी ऐश डंपिंग और धूल प्रदूषण की शिकायतें सामने आई हैं। भूजल प्रदूषण और स्वास्थ्य प्रभावों पर स्वतंत्र अध्ययन की मांग की जा रही है।

🔹 रोजगार और पारदर्शिता की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी रोजगार सीमित होंगे और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता की स्पष्ट गारंटी नहीं है।

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