कैसे महाकुंभ बना युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मंच

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✋ हाथ की कला और तकनीक का अनोखा संगम

Mahakumbh नगर में एक युवक ने हुनर और तकनीक को जोड़कर मिसाल पेश की।
हाथ की कला से उसने रोजगार ( Job ) का मजबूत जरिया तैयार किया है।

👤 राजस्थान से आया हुनरमंद नौजवान

राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोखरण निवासी Dev Ram ने यह पहल की।
उन्होंने महाकुंभ को अवसर में बदल दिया।

🖨️ देव कृपा फोटो प्रिंटिंग बनी पहचान

देव राम ने “देव कृपा फोटो प्रिंटिंग” नाम से काम शुरू किया।
वे बनियान और सिंथेटिक कपड़ों पर फोटो व नाम प्रिंट करते हैं।

💰 नाम छपाई की सबसे ज्यादा मांग

एक बनियान पर नाम छपाई के लिए वे 200 रुपये लेते हैं।
श्रद्धालुओं में नाम प्रिंट कराने की सबसे ज्यादा मांग है।

🎨 धार्मिक और फिल्मी चित्रों की छपाई

कुंभ से जुड़े धार्मिक चित्र खूब पसंद किए जा रहे हैं।
फिल्मी कलाकारों की फोटो भी युवा वर्ग छपवा रहा है।

📚 शिक्षा के बाद हुनर से बदली राह

देव राम ने इंटर तक शिक्षा प्राप्त की।
पांच साल चाचा के स्टूडियो में काम सीखकर अनुभव हासिल किया।

🚀 नौकरी छोड़ शुरू किया खुद का काम

आर्थिक स्थिति मजबूत होने पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
आधुनिक तकनीक को अपनाकर खुद का व्यवसाय खड़ा किया।

🏪 सेक्टर एक में लगाई दुकान

महाकुंभ क्षेत्र के सेक्टर एक में उन्होंने दुकान ली।
महंगी दुकान होने के बावजूद काम तेजी से चल रहा है।

👦 युवाओं और बच्चों की लगी रहती है भीड़

उनकी दुकान पर हमेशा भीड़ नजर आती है।
खासकर बच्चे और युवा इस कला को खूब पसंद कर रहे हैं।

🤝 दूसरों को भी दे रहे रोजगार

देव राम खुद के साथ अन्य युवाओं को भी काम दे रहे हैं।
यह आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करता है।

📊 एक नजर में पूरी जानकारी

विवरणजानकारी
नामदेव राम
निवासीपोखरण, जैसलमेर (राजस्थान)
व्यवसायदेव कृपा फोटो प्रिंटिंग
कार्यकपड़ों पर नाम व फोटो प्रिंट
स्थानसेक्टर 1, महाकुंभ नगर
नाम प्रिंट शुल्क₹200 प्रति बनियान
मुख्य ग्राहकश्रद्धालु, युवा, बच्चे
विशेषताहाथ की कला + आधुनिक तकनीक

🔎 महाकुंभ बना रोजगार का मंच

महाकुंभ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है।
यह युवाओं के लिए व्यापार और रोजगार का बड़ा अवसर भी है।

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