🔹 आठवां पड़ाव पूरा
मिथिला मध्य परिक्रमा का आठवां दिन सफलतापूर्वक पूरा हो गया। महोत्तरी जिले के कञ्चनवन में रात्रि विश्राम के बाद श्रद्धालु मंगलवार को नौवें दिन धनुषा के लिए रवाना हुए।
कञ्चनवन इस यात्रा का विशेष पड़ाव माना जाता है, क्योंकि यहां होली महोत्सव का विशेष महत्व है।
🔹 133 किलोमीटर की आस्था यात्रा
मिथिला मध्य परिक्रमा कुल 133 किलोमीटर के वृत्त में 15 दिनों तक चलती है। इसका केंद्र जनकपुरधाम है।
यात्रा की शुरुआत फागुन अमावस्या को मिथिलाविहारी मंदिर ठेराकचुरी से हुई थी। श्रद्धालु मिथिलाविहारी (श्रीराम) और किशोरीजी (सीताजी) की प्रतिमाओं को डोला में लेकर नंगे पांव यात्रा करते हैं।
🔹 नेपाल और भारत दोनों में पड़ाव
इस परिक्रमा में नेपाल के महोत्तरी और धनुषा जिलों में 107 किलोमीटर की दूरी तय की जाती है। वहीं भारत के मधुबनी जिले में 26 किलोमीटर यात्रा होती है।
धनुषा में छह और मधुबनी में चार रात्रि विश्राम की परंपरा है।
🔹 आस्था और मोक्ष का संदेश
मटिहानी के लक्ष्मीनारायण मठ के अनुसार, त्रेतायुग में श्रीराम और माता सीता ने विवाह के बाद मिथिला क्षेत्र में भ्रमण किया था। उन्हीं पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए मिथिला मध्य परिक्रमा की परंपरा शुरू हुई।



